दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में बुधवार को एबीवीपी समर्थक छात्रों ने जमकर उत्पात मचाया और पत्रकारों से भी मारपीट की गई. जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद और शेहला राशिद को रामजस में बुलाने को लेकर एबीवीपी समर्थक छात्रों ने ये बवाल किया.

दरअसल, रामजस कॉलेज प्रशासन ने ‘कल्चर ऑफ प्रोटेस्ट’ नाम के दो दिवसीय कार्यक्रम में उमर ख़ालिद और शेहला रशीद को निमंत्रण दिया था. जिसे एबीवीपी के विरोध के बाद रद्द कर दिया गया. बुधवार को निमंत्रण रद्द करने के मसले को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए.

सेमिनार के आयोजकों का दावा है कि एबीवीपी के सदस्यों ने पत्थर फेंके, सेमिनार कक्ष को बंद किया और बिजली की आपूर्ति काट दी.. एबीवीपी ने इस आरोप का खंडन किया है. स्वराज इंडिया पार्टी के संस्थापक योगेंद्र यादव ने इस बारें में ट्वीट किया कि  ‘रामजस कॉलेज से परेशान करने वाली रिपोर्ट है. स्टूडेंट्स को कॉलेज में लॉक कर दिया, उन्हें पीटा और धमकाया गया जबकि पुलिस केवल देखती रही.’ वहीं, पुलिस अधिकारियों का दावा है कि वह कैंपस में उपिस्थत थे और हिंसा की कोई घटना नहीं हुई.

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ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आईसा) की दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) इकाई की अध्यक्ष कवलप्रीत कौर ने आईएएनएस से कहा, “एबीवीपी के लोग एक विरोध मार्च में हिस्सा लेने आए छात्रों को कॉलेज से निकलने नहीं दे रहे.

उमर ख़ालिद ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में इस बारें में लिखा कि पुलिस ने उनसे कहा है कि अगर वो कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं तो पुलिस उन्हें सुरक्षा नहीं दे सकेगी. उन्होंने लिखा, “हमारे देश में प्रजातंत्र की ये हालत हो गई है जहां हमलावरों को पूरी सुरक्षा दी जाती है और जो हमले का सामना कर रहे हैं उन्हें ही हमले के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

उमर ख़ालिद जेएनयू के उन पांच छात्रों में एक हैं जिन पर पिछले साल देशद्रोह का आरोप लगा था और जेल हुई थी. उन पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में शामिल होने का आरोप था जिसमें भारत विरोधी नारे लगाए गए थे.

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