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असम में जारी हुए एनआरसी यानी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के मसले को लेकर देश मे पहले ही बड़ा घमासान जारी है। अब सरकार की और से इस में एक शर्त और जोड़ दी गई है। जिसके तहत कई लोग NRC में नाम नहीं आने पर दोबारा अपील नहीं कर पाएंगे।

राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि जिन लोगों ने 31 अगस्त 2015 तक आवेदन नहीं किया था, वे दावा और आपत्ति दाखिल करने के लिए तय समयसीमा 10 अगस्त और 28 सितंबर के बीच आवेदन नहीं कर सकते।

अधिकारी ने बताया कि जो लोग 2015 में अपना आवेदन नहीं कर सके थे, उनके बारे में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कोई फैसला अंतिम एनआरसी के प्रकाशन के बाद किया जाएगा। अंतिम एनआरसी का प्रकाशन सभी दावे और आपत्तियां निबटाने, शुद्धि करने के बाद ही किया जाएगा और इसके प्रकाशन की तारीख उच्चतम न्यायालय तय करेगा।

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उन्होने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अनवरा तैमूर और पूर्व राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद के रिश्तेदारों समेत अनेक नामी-गिरामी हस्तियों ने निश्चित समयसीमा के भीतर अपना आवेदन नहीं किया था और इसी लिए उनका नाम सूची से गायब है।उन्होंने कहा कि 31 अगस्त 2015 के बाद पैदा हुए किसी बच्चों को दावा के मार्फत शामिल नहीं किया जा सकता।

अधिकारी ने कहा कि अगर कोई आवदेनकर्ता आवेदनपत्र दाखिल किए जाने के बाद मरता है और अगर वह योग्य है तो उसका नाम अंतिम एनआरसी से नहीं हटाया जाएगा। दावा और आपत्तियां नागरिक पंजीयन के स्थानीय पंजीयक को एनआरसी सेवा केन्द्रों (एनएसके) में जमा करना होगा ये आॅनलाइन नहीं होगा। इतना ही नहीं दावा सिर्फ उन ही एनएसके में दाखिल किया जा सकता जहां उसने अपना आवेदन दाखिल किया था, भले ही उसका पता बदल क्यों न गया हो।

दावा, आपत्ति और शुद्धि के फॉर्म एनएसके में उपलब्ध कराए जाएंगे। इन्हें 10 अगस्त से एनआरसी वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। दावा, आपत्ति और शुद्धि के फॉर्म अलग-अलग होंगे।

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