कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धीरमैया ने नानवेज के सेवन के बाद मंदिर में जाने को रोके जाने को गलत करार देते हुए सवाल उठाया कि भगवान ने कहाँ लिखा है कि भक्त मांस खाकर मंदिर में भगवान के दर्शन नहीं कर सकता.

सिद्धीरमैया के इस बयान के बाद देश में एक नई बहस शुरू हो गई है. हालाँकि ये बहस दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत में जोरो-शोरो पर है. दरअसल, दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में मछली एक आम भोजन है.

इस सबंध में दक्षिण भारत के हिंदू धर्मगुरु कुछ भी कहने से बच रहे है. पुत्तूर के एक पुरोहित कृष्णा भट का कहना है कि लोगों को अल्कोहल लेने के बाद एक मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं करना चाहिए. हालांकि उन्होंने नॉनवेज खाने के बाद भगवान के दर्शन करने वालों पर कोई टिप्पणी नहीं की.

उन्होंने कहा कि हिंदू धार्मिक अभिलेखों के अनुसार मंदिर में भगवान के दर्शन करने से पहले भक्तों को कुछ धार्मिक क्रियाओं का पालन करने चाहिए. उन्होंने कहा, मंदिर में आने से एक दिन पहले और उस दिन पहले भोजन में मांस का सेवन नहीं करना चाहिए.

वहीं क्षेत्र धर्मस्थल के धर्माधिकारी डी वीरेन्द्र हेगड़े के पट्टेभर्षि के 50 वें वर्धापनोत्सव में व्यस्त होने के कारण मंदिर प्रशासन की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं आ पाई.

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