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गुवाहाटी: नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) का पहला ड्राफ्ट सोमवार को जारी कर दिया गया है. इस ड्राफ्ट में 3.29 करोड़ लोगों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल किये गए है. यानि 1.9 करोड़ को ही भारत का वैध नागरिक माना गया है. इसके अलावा 1 करोड़ 39 लाख लोगों के नाम नहीं है. इन लोगों को अभी भी अगले ड्राफ्ट का इंतजार करने को कहा गया है.

इसी बीच अब असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल ने कहा कि उनकी सरकार उन लोगो को कोई संवैधानिक दर्जा नहीं देगी, जिनके नाम नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) की अंतिम सूची में नहीं आएंगे. सोनेवाल ने कहा, उन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किए गए मानवीय अधिकार ही मिलेंगे.

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सोनोवाल ने कहा, ऐसे लोगों को भारत में रहने की तब तक इजाजत होगी, जब तक केंद्र सरकार उनके निष्कासन पर कोई फैसला नहीं लेती है. उन्हें कुछ समय तक रहने के लिए स्थान, खाना और कपड़े मुहैया कराए जाएंगे. इसके अलावा उन्हें किसी तरह की कोई सुविधा नहीं मिलेगी. उन्हें कोई भी संवैधानिक अधिकारों के अलावा मूलभूत अधिकार और चुनाव का अधिकार भी नहीं दिया जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘एनआरसी के पहले ड्राफ्ट में कुल आवेदनों के करीब 40 प्रतिशत नाम हैं. दूसरे ड्राफ्ट के लिए छंटनी जल्द शुरू होगी. इस फेज के पूरा हो के बाद जिन लोगों के नाम एनआरसी में नहीं होंगे, उन्हें अपने दावे के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ेगा. उन्हें एनआरसी के हिसाब से तय किए गए दस्तावेज दिखाने होंगे.

ध्यान रहे असम में मुसलमानों की आबादी 34 फीसदी से ज्यादा है. कथित तौर पर कहा जाता है कि इनमे कई लोग बांग्लादेशी है.’ बीजेपी चुनावों से पहले वादा कर चुकी थी कि वह अवैध बांग्लादेशी मुस्लिमों को निकालेगी और असम में अवैध घुसपैठ करने वाले हिंदुओं को नागरिक का दर्जा देगी. इसी सिलसिले में नागरिकता कानून में संशोधन के लिए एक कानून संसद में लंबित है.

भारत और बांग्लादेश के बीच कोई भी निर्वासन संधि न होने की बात पर सोनोवाल ने कहा, ‘निर्वासन का मामला बाद में आता है. हमारा पहला उद्देश्य विदेशी नागरिकों की पहचान करना है. बाद में हम क्या कार्रवाई करेंगे, इसका फैसला बाद में होग.’ उन्होंने कहा कि एनआरसी के बाद राज्य के लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी.