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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 में अपने गृह राज्य गुजरात के विकास मॉडल का हवाला देकर सत्ता में आए थे। लेकिन अब इस मॉडल पर ही सवाल खड़े हो रहे है। द कॉम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (CAG) ने बताया कि ‘खुले में शौच मुक्त राज्य’ गुजरात सरकार का सिर्फ एक हव्वा है।

बुधवार को गुजरात विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में CAG ने बताया, गुजरात के बनासकांठा, दाहोद, डंग, छोटा उदेपुर, पाटन, जामनगर, जूनागढ़ और वलसाड जिलों में अभी भी कई घरों में शौचालयों का निर्माण नहीं हुआ है। बावजूद गुजरात सरकार ने मार्च में घोषित कर दिया था कि राज्य के सभी जिले खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं।

केन्द्र सरकार ने बीते साल 2 अक्टूबर को लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया था कि देश के 11 राज्य, जिसमें गुजरात भी शामिल है, स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं।

कैग ने ये भी बताया कि काफी लोग शौचालय होते हुए भी उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे है। कैग ने इसके लिए पानी उपलब्ध ना होना और शौचालयों में गंदगी जैसे कारण गिनाए हैं। कैग ने गुजरात सरकार के फ्लैगशिप हेल्थ स्कीम के मुख्यमंत्री अमरुतम और मुख्यमंत्री अमरुतम वात्सल्य जैसी योजनाओं में भी गंभीर लापरवाही उजागर की है।

कैग ने गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के कारण राज्य के खजाने को 17061 करोड़ रुपए का नुकसान होने का भी मुद्दा उठाया।

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