बंगलुरु: कर्नाटक में विधानसभा की तारीखे जैसे-जैसे नजदीक आ रही है. भगवा पार्टी और संगठन धुर्विकरण में लगे है. तो वहीँ दूसरी और इनसे निपटने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व पर चल रही कांग्रेस मुस्लिमों की बलि दे रही है. इस बात की पुष्टि राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बयान से हुई है.

अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के आरोपों से पीछा छुड़ाने के लिए 2013 और 2017 के बीच हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में बड़ी तादाद में मुस्लिमों को गिरफ्तार किया गया. राज्य की कांग्रेस सरकार इसके लिए बाकायदा खुद की पीठ भी थपथपा रही है.

पिछले तीन सालों में  2013 और 2017 के बीच, सांप्रदायिक हिंसा के लिए 1,254 लोगों को गिरफ्तार किया गया. जिनमे 578 हिंदुओं के साथ 670 मुस्लिम गिरफ्तार किए गए. इसके अलावा 6 ईसाईयों को भी गिरफ्तार किया गया.

गृह मंत्री आर रामलिंगा रेड्डी ने कहा, “जब सांप्रदायिक हिंसा की बात हो, हमने किसी भी समुदाय का समर्थन नहीं किया. रेड्डी ने कहा, “हमने अपने राजनैतिक या धार्मिक संबंधों के बावजूद हिंसा के अपराधियों को गिरफ्तार किया और इन मामलों में आरोपपत्र भी दायर किए हैं. हमने कानून की किसी को इजाजत नहीं दी है.”

कांग्रेस का इस खंडन का उद्देश्य भाजपा के आक्रामक विवाद को खत्म करना है, जो मंगलूर में हिंदू कार्यकर्ता दीपक राव की मौत के बाद तेज हो गया है. भगवा पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ कांग्रेस के समर्थन के कारण मुस्लिम फ्रिंज समूहों के सदस्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो हिंदू विरोधी है. भाजपा प्रवक्ता सीटी रवी ने आरोप लगाया, “राजनीतिक लाभ के लिए  कांग्रेस हत्या की अनुमति दे रही है.

आरोप को खारिज करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, “भाजपा विधानसभा चुनावों के चलते सांप्रदायिक तरीके से वोटों के ध्रुवीकरण का सहारा ले रही है. बीजेपी हिंदू समूहों द्वारा शुरू किए गए सांप्रदायिक हिंसा के बारे में नहीं बोलेंगे.”

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