बीते मंगलवार को बजट सत्र के दूसरे दिन विधानसभा में एनआरसी नहीं लागू करने और एनपीआर 2010 के प्रारूप अनुसार करने का प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद बिहार विधानसभा ने आज सर्वसम्मति से 2021 में जातीय आधार पर जनगणना कराने का प्रस्ताव पारित किया।

विधानसभा में सभाध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि 25 फरवरी को राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) ,राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर दिये गये कार्यस्थगन प्रस्ताव के मंजूर होने के बाद हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि 2021 की जनगणना जातीय आधार पर होनी चाहिए । पूर्व में भी इस संबंध में दोनों सदनों से सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित हुआ था।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि जनगणना कराने समय अब करीब आ गया है इसलिए एक बार फिर से सदन से इससे संबंधित प्रस्ताव पारित कराकर केन्द्र को भेजा जाना चाहिए। चौधरी ने कहा कि उस दिन उन्होंने कहा था कि इसका प्रस्ताव उपयुक्त समय पर लाया जायेगा। इसलिए, आज वह सदन में प्रस्ताव रखते हैं कि प्रस्तावित जनगणना जातिगत आधार पर हो । इसके बाद सभी दलों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को पारित कर दिया।

बिहार में राजनीतिक पार्टियां लंबे समय से जातीय जनगणना की मांग कर रही थी और यह मुद्दा राजनीति का एक अस्त्र बना हुआ था। लालू प्रसाद यादव जातीय जनगणना को लेकर कई बार सवाल उठा चुके हैं। वहीं नीतीश कुमार भी कई मौको पर यह बात कह चुके हैं कि जातीय आधारित जनगणना की जरूरत महसूस हो रही है।

केंद्र सरकार द्वारा सीएए कानून पारित किए जाने के बाद अल्पसंख्यकों के बीच बिहार में विपक्षी पार्टियां एनआरसी का भय दिखा सरकार पर निशाना साध रही थी। नीतीश कुमार ने इस राजनीतिक मुद्दे पर भी विराम लगा दिया।

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