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झारखंड के जमशेदपुर की धार्मिक संस्था निफाज-ए-शरिया हिन्द ने सयुंक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में प्रस्तावित मंदिर को लेकर कहा कि सरजमीन-ए-अरब पर मंदिर बनाने की इजाजत देने वाले और उनका समर्थन करने वाले मुसलमान नहीं है.

सियासत की रिपोर्ट के अनुसार, हदीस का हवाला देते हुए निफाज-ए-शरिया की और से कहा गया है कि अरबों की बर्बादी उनकी अपनी करतूत की वजह से होगी. इस दौरान कहा गया कि आज कुछ लोगों के नाम मुसलमानों जैसे हैं. मगर, वह मूर्ति की पूजा करते हैं. मंदिर के निर्माण का समर्थन भी करते हैं. ऐसे लोगों को मंदिरों से भी लगाव है. ऐसे लोग विश्वास के लायक नहीं हैं. हमारे देश में भी चंद ऐसे लोग हैं जो राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर तथाकथित मुसलमान हो कर इस्लाम और इस्लामी कानून की जड़ें खोद रहे हैं.

ध्यान रहे हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अबू धाबी में एक मंदिर का शिलान्यास किया है. यह मंदिर स्वामिनारायण संप्रदाय के बीएपीएस सेक्ट का है. बाप्स सेक्ट में पाटीदारों का वर्चस्व रहा है. दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर भी इसी संप्रदाय का है. स्वामिनारायण संप्रदाय के विदेशों में दर्जनों मंदिर है.

आप को बता दें कि ऐसा नहीं है कि खाड़ी के देशों में हिन्दू मंदिर नहीं है. क़तर, कुवैत और दुबई में पहले से ही हिन्दू मंदिर मौजूद हैं. हालांकि जब ये मंदिर बने थे तो उस रूप में प्रचार प्रसार नहीं किया गया था. इन मंदिरों के बनाने में वहां रह रहे हैं हिन्दुओं का बड़ा योगदान रहा है.

खाड़ी के देशों में भारत के राजदूत रहे तलमीज़ अहमद के अनुसार ”अरब देशों की बात करें तो कुवैत, बहरीन, कतर, दुबई, शारजाह और ओमान में पहले से ही मंदिर हैं, सिर्फ अबू धाबी में नहीं था, क्योंकि वहां ज़्यादा भारतीय आबादी नहीं थी. सिर्फ़ सऊदी अरब ऐसा देश है जहां कोई हिंदू मंदिर नहीं है क्योंकि वहां ग़ैर मुस्लिम के लिए प्रार्थना की जगह ही नहीं है.”

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