उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मिली एतिहासिक जीत के कारण राज्य की विधानसभा में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व पिछले पचास सालों में सबसे कम पर पहुँच गया हैं. सपा, बसपा और कांग्रेस जैसे दलों के कई मुस्लिम उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा हैं.

1967 के बाद से अब पहली बार यूपी की विधानसभा में सबसे कम मुस्लिम उम्मीदवार पहुंचे हैं. इस बार विधानसभा पहुँचने वाले मुस्लिम विधायकों की संख्या केवल 23 ही रह गई हैं. इस बार विधानसभा में पहुंचने वाले सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक सपा से आये हैं. 23 में से 17 विधायक सपा से हैं. जबकि बीएसपी के चार मुस्लिम उम्मीदवार विधानसभा पहुंचे हैं. वहीं कांग्रेस के सात में से दो विधायक मुस्लिम हैं.

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ऐसे में कथित तौर पर कुछ लोग इसके लिए आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को जिम्मेदार ठहराया हैं. महाराष्ट्र के नांदेड़ में लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए असदुद्दीन ओवैसी का पुतला जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया. लोगों का मानना है कि ओवैसी ने बीजेपी की मदद करने के लिए अपने उम्मीदवार उतारे थे. जिन्होंने वोट काटकर बीजेपी की जीत में मदद की.

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