दिल्ली के सिविल लाइन्स इलाके के ट्रामा सेंटर के नज़दीक दिल्ली पुलिस के शहीद जवान अब्दुल सबूर खान का परिवार कई दिनों से अनशन पर बैठा हुआ था। उनकी मांग केजरीवाल सरकार की और से पूरी कर दी गई है।

दिल्ली सरकार ने मंगलवार को शहीद मेजर अमित सागर समेत 14 शहीदों के नामों को मंजूरी दी जिनके परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। सरकार के एक बयान में कहा गया कि मेजर सागर के अलावा सूची में दिल्ली पुलिस के आठ शहीद और दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) के पांच नाम शामिल हैं जिन्होंने ड्यूटी करते वक्त शहादत पाई।

विज्ञप्ति में कहा गया कि डीएफएस के पांच शहीदों के नाम फायरमैन सुनील कुमार, मंजीत सिंह, हरि सिंह मीणा, हरिओम और विजेंद्र पाल सिंह के अलावा दिल्ली पुलिस के आठ शहीद हेड कांस्टेबल राम कंवर मीणा व अब्दुल सबूर खान और कांस्टेबल योगेश कुमार, आनंद सिंह, बिनेश कुमार, यशवीर सिंह, रविंदर और दीपक कुमार का नाम भी शामिल हैं।

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बता दें कि 4 मार्च 2016 को दिल्ली पुलिस में तैनात हेड कॉन्स्टेबल अब्दुल सबूर को एक ट्रक ने बुराड़ी के पास चेकिंग के दौरान कुचल दिया था। अब्दुल की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। 80 साल की हनीफ खातून अपनी बहू मलका खातून के साथ पिछले 28 सितंबर से अनशन पर बैठीं है।

अब्दुल राजस्थान के करौली जिले के रहने वाले थे । उन्हें पूरे पुलिस सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई थी। अब्दुल घर में कमाने वाले अकेले सदस्य थे। अब्दुल के घर वालों का कहना है कि अब तक ढाई साल बीत गया है। लेकिन दिल्ली सरकार से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है और ना ही शहीद का दर्जा मिला।

80 साल की बुजुर्ग हनीफ खातून बेटे के सम्मान के लिए ढाई साल से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने के लिए चक्कर काट रही थी। लेकिन सीएम साहब मिलने को राज़ी नही हुए।

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