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नई दिल्ली। अब दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को तय होगा कि ऑड ईवन फॉर्मूले को आगे जारी रखा जाए या नहीं। आज हुई सुनवाई के दौरान जहां दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम होने का दावा किया तो केंद्रीय एजेंसियों का कहना है कि इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। उलटे लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं।

पिछले 8 दिनों से दिल्ली के लोग मुश्किलों का सामना करके भी ऑड-ईवन नियम का पालन कर रहे हैं। हर दिन वो अपने दफ्तर और दूसरी जगह जाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। 95 फीसदी जनता दिल्ली में ऑड-ईवन नंबर का महज इसलिए कर रही है ताकि उसकी दिल्ली स्वच्छ हो ताकि दिल्लीवासी साफ सुथरी हवा में सांस ले सकें।

आठ दिनों की इस जद्दोजहद के बाद भी दिल्लीवालों के लिए भ्रम की स्थिति में हैं कि आखिर उनके इस प्रयास का नतीजा सार्थक है या नहीं? हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने ये जरूर दावा किया है कि पिछले 7 दिनों में प्रदूषण का स्तर घटा है। दिल्ली सरकार का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि सरकार का मत है कि आगे भी जरूरत पड़ने पर ये फॉर्मूला लागू किया जा सकता है।

दिल्ली सरकार ने एनवायरमेंट पॉल्यूशन प्रिवेंशन एंड कंट्रोल कमेटी के आंकड़ों को दिखाते हुए दावा किया है कि दिल्ली में प्रदूषण कम हुआ है। दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार 22 दिसंबर को दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 448 था। जो 3 जनवरी को घटकर 351 हो गया। इसी तरह से 4 जनवरी को दोपहर 2 बजे पीएम 2.5 का 500 था। जो शाम को घटकर 200 हो गया। साथ ही दिल्ली में नाइट्रोजन ऑक्साइड छोड़ने का स्तर प्रति व्यक्ति 50 फीसदी तक घट गया है। इसके अलावा सड़कों पर जाम भी कम कम हुआ।

दूसरी तरफ सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ एंड साइंस की ने जो रिपोर्ट दाखिल की है वो दिल्ली सरकार के दावे के उलट है। इसके मुताबिक ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू होने के बावजूद प्रदूषण का स्तर या तो बरकरार रहा है या फिर बढ़ गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर के महीने में पंजाबी बाग में पीएम 2.5 स्तर 200 से 340 था, जबकि 31 दिसंबर से 7 जनवरी तक 240 से 471 तक पहुंच गया। इसी तरह से आनंद विहार इलाके में दिसंबर में पीएम 2.5 का स्तर 260 से 510 था जबकि ऑड-ईवन लागू होने के बाद 291 से 458 के बीच रहा। यही नहीं मंदिर मार्ग में इलाके में दिसंबर में पीएम 2.5 का स्तर 90 से 339 था जो एक से 7 जनवरी के बीच 150 से 359 रिकॉर्ड किया गया।

मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस के प्रदूषण के रिकॉर्ड में भी एक जनवरी से 7 जनवरी के बीच एयरपोर्ट, मथुरा रोड, लोधी रोड, दिल्ली यूनिवर्सिटी इलाके में पीएम 2.5 का स्तर 250 से 450 के खतरनाक स्तर पर था। एजेंसियों की इसी रिपोर्ट ने विरोधियों को निशाना साधने का मौका दे दिया है।

सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट में कहा कि वो कारों की संख्या पर तो अंकुश लगा सकती है, लेकिन भगवान से कहकर दिल्ली में हवा नहीं चलवा सकती। साथ ही ठंड भी प्रदूषण की एक वजह है। बहरहाल अब किस एजेंसी के आंकड़े सही हैं और क्या वास्तव में दिल्ली में प्रदूषण कम हुआ है? अब ये सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट तय करेगा और हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही ऑड-ईवन का भविष्य भी तय होगा। साभार: ibnlive

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