Thursday, October 28, 2021

 

 

 

मजदूर से टीचर बने नीरज को ब्रिटेन के डायना अवॉर्ड से सम्मानित किया गया

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नई दिल्ली: झारखंड के गिरिडीह जिले के रहने वाले 21 वर्षीय युवक नीरज मुर्मू को ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड से नवाजा गया है। उन्हे ये सम्मान हाशिए के बच्‍चों को शिक्षित करने के लिए दिया गया है।

नीरज पूर्व में बाल मजदूर रह चुके हैं और अब कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन (KSCF) से जुड़े हैं। नीरज खदान में बाल मजदूरी करते थे। बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के कार्यकर्ताओं ने उसे बाल मजदूरी से मुक्‍त कराया था।  इसके बाद उनका गांव ‘बाल मित्र ग्राम’ बन गया।

बाल मित्र ग्राम (बीएमजी) के कार्यकारी निदेशक (प्रोग्राम) पीएन मालथी ने नीरज मुर्म को बधाई देते हुए कहा, ”हमें गर्व है कि उन्होंने पूर्व बाल श्रमिकों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने जैसी पहल की है। वह हमारे बाल मित्र ग्राम में कई बच्चों के लिए एक आदर्श है जहां प्रत्येक बच्चा एक मजबूत नेता है और अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए सशक्त है।”

बीएमजी बाल केंद्रित ग्राम विकास को बढ़ावा देती है जिसमें बच्चों का सशक्तिकरण प्रमुख है। नीरज के प्रमाणपत्र में इस बात का विशेष रूप से उल्‍लेख है कि दुनिया बदलने की दिशा में उन्होंने नई पीढ़ी को प्रेरित और गोलबंद करने का महत्वपूर्ण काम किया है। कोरोना महामारी सकंट की वजह से उन्हें यह अवार्ड डिजिडल माध्यम द्वारा आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया।

डायना अवार्ड मिलने पर अपनी खुशी साझा करते हुए नीरज कहते हैं, ‘‘इस अवार्ड ने मेरी जिम्‍मेदारी को और बढ़ा दिया है। मैं उन बच्‍चों को स्‍कूल में दाखिला दिलाने के काम में और तेजी लाऊंगा, जिनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गई है। साथ ही अब मैं बाल मित्र ग्राम के बच्‍चों को भी शिक्षित करने पर अपना ध्‍यान केंद्रित करूंगा। नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्‍यार्थी मेरे आदर्श हैं और उन्‍हीं के विचारों की रोशनी में मैं बच्चों को शिक्षित और अधिकार संपन्‍न बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा हूं।’’

नीरज को डायना अवार्ड मिलने पर केएससीएफ की कार्यकारी निदेशक (प्रोग्राम) श्रीमती मलाथी नागासायी कहती हैं, “हमें गर्व है कि नीरज ने पूर्व बाल श्रमिकों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण पहल की है। वह हमारे बाल मित्र ग्राम के बच्चों के लिए एक आदर्श है, जहां का हर बच्चा अपने आप में एक सशक्‍त नेता है और अपने अधिकारों को हासिल करने के साथ अपने गांव के विकास के लिए तत्‍पर और संघर्षशील है।”

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