Friday, September 17, 2021

 

 

 

देश में प्रेम और भाईचारे की भावना का सुरक्षित रहना जरूरी

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केसरगंज/बहराइच: मदरसा बरकाते रज़ा और मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (MSO) के तत्वाधान में ज़िला बहराइच के कैसरगंज कस्बे के टंडेचतुर मे बरकाते रज़ा मदरसा में गणतन्त्र दिवस के अवसर पर भारतीय आजादी के महान क्रांतिकारियों के योगदान पर प्रोग्राम का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं के सामने वक्तावों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रभक्ति की भावना को बढ़ाने पर बल दिया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मौलाना शंसुद्दीन ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए युवा पीढ़ी ख़ासकर मुस्लिम युवको को आगे आना होगा । देश तभी सुरक्षित रहेगा जब तक देश में प्रेम वह भाईचारे की भावना रहेगी। भारत की अखंडता की सबसे बड़ी शक्ति एकता ही है इसलिए हमें भारतीय के तौर पर एकजुट रहना होगा । कहा कि युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन बहुत ज़रूरी है। अपने उद्बोधन मे उन्होने महान सेनानी सैफुद्दीन किचलू को याद करते हुये कहा कि किचलू एक स्वतंत्रता सेनानी, वकील, व भारतीय राष्ट्रवादी नेता थे।

किचलु गांधी जी के सम्पर्क में आने पर राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पड़े और कांग्रेस में शामिल हो गए। इन्हें पंजाब राज्य से कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। 1919 के खिलाफत आंदोलन का नेतृत्व किया और रोलेंट एक्ट के खिलाफ अमृतसर में विरोध प्रदर्शन के आरोप में डा• सैफुद्दीन, उनके दोस्त डॉ• सत्यपाल व गांधी जी को गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों की गिरफ्तारी के विरोध प्रदर्शन में जलियांवाला बाग में एक सभा का आयोजन किया गया। सभा में मौजूद भीड़ पर जनरल डायर द्वारा गोलियां चलवा दी गई। इसे जलियांवाला हत्याकांड कहा जाता है। 1940 मे मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान की मांग तथा उसकी नीतियों का विरोध किया। 1942 में गांधी जी के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।1947 में भारत के बंटवारे का घोर विरोध किया। 9 अक्टूबर, 1963 को उन्होंने अंतिम सांस ली।

मदरसा बरकाते रज़ा के अध्यापक मौलाना अब्दुल मजीद रिजवी ने आज़ाद हिन्द फौज के पदाधिकारी मेजर जनरल शाह नवाज खान को याद करते हुये कहा कि खान एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय राष्ट्रीय सेना में एक अधिकारी के रूप में कार्य किया था। मेजर जनरल शहनवाज को मुस्लिम लीग ने अपनी ओर से मुकदमा लड़ने की पेशकश की, लेकिन इस देशभक्त सिपाही ने कांग्रेस द्वारा जो डिफेंस टीम बनाई गई थी, उसी टीम को ही अपना मुकदमा पैरवी करने की मंजूरी दी। मजहबी भावनाओं से ऊपर उठकर शहनवाज का यह फैसला सचमुच प्रशंसा के योग्य था। आजाद हिन्दुस्तान में लाल किले पर ब्रिटिश हुकूमत का झंडा उतारकर तिरंगा लहराने वाले जनरल शाहनवाज ही थे. देश के पहले तीन प्रधानमंत्रियों ने लालकिले से जनरल शाहनवाज का जिक्र करते हुए संबोधन की शुरुआत की थी.

MSO के सचिव सिराज आली कादरी ने कहा कि देश को गुलामी की बेड़ियों से आजाद करवाने के लिए हजारों देशभक्तो और सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी. इन महान देभक्तों में जनरल शाहनवाज खान का नाम बड़े आदर और मान से लिया जाता है. आजाद हिंद फौज के मेजर जनरल शाहनवाज खान महान देशभक्त, सच्चे सैनिक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बेहद करीबियों में शुमार थे. उन्होने कहा कि ये दिन हमारा क़ौमी त्योहार है,जो सब एक साथ भरपुर जज़्बे के साथ मनाते हैं, लेकिन हमे उन मुजाहिदीन ए आज़ादी की क़ुर्बानियों को भी याद करना चाहिये जिनकी बदौलत ये दिन देखने को मिला, उन्होंने पूरी अखण्डता, इत्तेहाद और कदम से क़दम मिलाकर ग़ुलामी की जंज़ीरों को तोड़ा था, अंग्रेजों को मुल्क से भगाया था, आज हमें संकल्प लेना है कि इसी तरह कन्धे का कन्धा मिलाकर देश से फ़िरक़ा परस्ती, भरष्टाचार नशा ख़ोरी को ख़त्म करना है ये ही सबसे बड़ी देश भक्ति होगी।

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