उज्जैन। उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ में अव्यवस्थाएं देख साधु-संतों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने रविवार को चेतावनी दी कि यदि यही हाल रहा तो वे मेला-स्थल छोड़ देंगे।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि महाराज ने रविवार को मीडिया से कहा कि पहले शाही स्नान में प्रशासनिक गलती के कारण सभी को परेशानी का सामना करना पड़ा, प्रशासन ने भी माना है कि पहले शाही स्नान के दौरान गलती हुई।

अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने भी प्रशासन पर जमकर भड़ास निकाली। उनका कहना है कि शाही स्नान में सबसे पहले नागा और साधु-संत स्नान करते हैं, उसके बाद आम लोग नहाते हैं। मगर उज्जैन के संभागायुक्त और जिलाधिकारी ने परंपराओं का मजाक उड़ाया और खुद पहले डुबकी लगा ली।

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उन्होंने कहा कि वैसे तो ये अधिकारी जिम्मेदार ओहदे पर हैं, मगर अपनी जिम्मेदारी न निभाते हुए उन्होंने संतों की परंपरा का मजाक उड़ाया। अगर उन्हें ही पहले स्नान करना था तो इतने साधुओं को बुलाकर शाही स्नान का नाटक कराने की क्या जरूरत थी।

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