Friday, December 3, 2021

बारामुला: घाटी लौटे 29 कश्मीरी पंडित परिवारों के रोजगार में मदद कर रहे मुस्लिम

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1989 90 में आतंकियों के अत्याचारों से परेशान होकर बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़ना पड़ा है। हालांकि अब उनकी फिर से धीरे-धीरे वापसी हो रही है। इतना ही नहीं वे बड़ी आत्मीयता से मुस्लिमों के साथ रह रहे है। ये लोग एक-दूसरे के दुख-सुख में खड़े होते हैं। व्यापार में भी हिंदू-मुस्लिम यकीन के साथ आपस में हाथ बंटाते हैं, साथ निभाते हैं।

बारामुला शहर के 27 वर्षीय सेल्समैन इश्फाक अहमद बताते है कि मालिक हृदयनाथ गंजू जो कि कश्मीरी पंडित हैं, वह शिवरात्रि मनाने के लिए इन दिनों जम्मू में हैं। मलिक कहते हैं, ‘मैं उनकी दुकान पर तकरीबन 11 वर्षों से काम कर रहा हूं। हर बार हिंदू त्योहार आते हैं और वह दुकान छोड़कर अपने जम्मू स्थित दूसरे घर चले जाते हैं। वह तकरीबन 1 महीने तक वहां रहते हैं और होली मनाकर वापस लौटते हैं। वह हम पर यकीन करते हैं और हम इस दौरान उनके व्यापार का पूरा ख्याल रखते हैं।’

hindu

गंजू का परिवार उन 29 कश्मीरी पंडितों में आता है, जो बारामुला में रहकर मुस्लिमों के सहयोग से अपनी दुकान चलाते हैं। वीरवान के पास कुछ कॉलोनियां बनी हुई हैं, जहां पर कश्मीरी पंडित रहते हैं। बारामुला ट्रेडर्स असोसिएशन के प्रेजिडेंट मोहम्मद अशरफ (65) कहते हैं, ‘हम एक दूसरे की खुशियों में शरीक होते हैं, फिर वह त्योहार हो, किसी का जन्मदिन हो या विवाह का आयोजन।’

अशरफ ने यह भी कहा, ‘1989 में जब लोगों ने मजबूरन पलायन किया तो हम मुस्लिमों को बहुत बुरा लगा था। मेरी दुकान के आगे वाली शॉप देखिए। इसे सोहन लाल बिंद्रू और उनके बेटे चलाते हैं। वह एक हकीम (स्थानीय डॉक्टर) हैं। वह और उनका परिवार यह व्यापार 70 वर्षों से चला रहा है। 1989 में वह यहां से चले गए थे लेकिन फिर कुछ वक्त बाद वापस आ गए। हम चाहते हैं कि हिंदुओं का यहां वापस आना चाहिए। हम सभी उनका स्वागत करेंगे।’

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