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देश के सबसे पिछड़े और अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज की दिन-प्रतिदिन राजनीतिक भागीदारी कम होने की चिंता अब समुदाय के भीतर भी दिखने लगी है. ऐसे में अब आबादी के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी को लेकर मुस्लिम समाज की और से आवाज बुलंद की जा रही है.

मुस्लिम महासभा की ओर से बाकायदा इस मांग के लिए आगामी दिनों में जनजागरण अभियान शुरू किया जाएगा. मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में महासभा से जुड़े लोग सभी जातियों को एक मंच पर लाने और राजनीतिक भागीदारी के लिए जागरुक करने का काम करेंगे.

मुस्लिम महासभा के प्रदेशाध्यक्ष अब्दुल सलाम सांखला और महामंत्री शकील अहमद ने बताया कि मुस्लिम समाज राजनीतिक रूप से तो जागरूक हैं तथा युवा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से जुड़ कर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहें हैं लेकिन मुस्लिम जनसंख्या के अनुपात में मुस्लिम प्रतिनिधि लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय में चुने नही जा पा रहें हैं.

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उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में सही राजनीतिक दिशा नहीं होने के चलते मुस्लिम मतदाता बहुल्य क्षेत्रों में भी अन्य समाजों के प्रतिनिधि चुने जाते हैं. इसी का फायदा उठा कर राजनीतिक पार्टियां मुस्लिम मतदाता बहुल्य क्षेत्रों से भी दूसरे समाजों के लोगों को अपना प्रत्याशी बनाती हैं. सरकार में पर्याप्त मात्रा में मुस्लिम समाज कि भागीदारी ना होने से मुस्लिम समाज से जुडी कई योजनाओं कि क्रियान्वति नहीं हो पाती हैं जिससे मुस्लिम समाज के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, एवं राजनीतिक उत्थान में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं.

इसी के मद्देनजर मुस्लिम महासभा ने आम सहमति से निर्णय लिया हैं कि वह मुस्लिम मतदाताओं और राजनीतिक दलों से जुडे कार्यकताओं को जागरूक करेगी तथा उन्हें इस बात के लिए आगाह किया जाएगा कि वह अपनी जनसंख्या अनुपात के हिसाब से राजनीतिक दलों से आगामी विधानसभा चुनावों में टिकटों की मांग करें तथा यह सुनिश्चित करें कि विधानसभा चुनावों में मुस्लिम मतदाता बहुल्य क्षेत्रों से मुस्लिमों प्रतिनिधियों को ही प्रत्याशी बनाया जाए.


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