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औरंगाबाद: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने औरंगाबाद में राष्ट्रीय एकता सम्मेलन में मुस्लिमों और दलितों को निशाना बनाये जाने को लेकर कहा कि अगर देश में मुस्लिमों और दलितों को ऐसे ही निशाना बनाया जाता रहा तो यह देश फिर विभाजन के कगार पर पहुंच सकता है.

मौलाना ने कहा कि देश के संविधान ने हर नागरिक को अपने पर्सनल लॉ पर अमल करने का अधिकार दिया है और संविधान से प्रिय कोई नहीं है. ऐसे में अगर मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव करना है तो इसके लिए सिर्फ मुसलमानों की राय ली जाए न कि पूरे देश की.

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उन्होंने देश में एकता के लिए सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया. उन्होंने सभी धर्मों के धर्मगुरुओं को संबोधित करते हुए कहा, आपसी एकता को सफलता की कुंजी हैं. इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा दौर में सांप्रदायिकता की बढती वृद्धि के लिए प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी कटाक्ष किया.

अधिवेशन में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से एक संकल्प भी पारित किया गया जिसमें सांप्रदायिक ताकतों के बढ़ते महत्वाकांक्षाओं पर सरकार की चुप्पी की निंदा की गई और देश के सभी निवासियों से आपसी सहिष्णुता से रहने की अपील की गई.

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