harish-rawat-namaz-18-1482132264-142643-khaskhabar

देहरादून | उत्तराखंड में मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक निर्णय उनके लिए गले की फांस बनता जा रहा है. हरीश रावत सरकार ने फैसला किया था की सभी सरकारी मुस्लिम कर्मचारियों को जुमे की नमाज पढने के लिए 90 मिनट की छुट्टी दी जाएगी. शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर मोहर लगाई गयी. चुनाव से ठीक पहले लिए गए इस फैसले पर सियासी रंग तो जरुर चढ़ना था और चढ़ा भी. अब सरकार अपने इस फैसले से बैकफुट पर है.

विपक्ष ने इस मुद्दे को सियासी रंग देना शुरू कर दिया है. बीजेपी प्रवक्ता नलिन कोहली और अनिल बलूनी ने सरकार पर आरोप लगाया की हरिश रावत सरकार मुस्लिम वोटो के लिए किसी भी हद तक जा सकती है. विपक्ष के अलावा सोशल मीडिया पर भी इस फैसले की काफी आलोचना हो रही है. इस बात से आजिज आकार आज सरकार ने अपना पक्ष रखा.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

हरीश रावत के मीडिया सलाहकार सुरेन्द्र कुमार उनका पक्ष लेकर मीडिया के सामने आये. उन्होंने कहा की सरकार ने सिर्फ मुसलमानों के लिए छुट्टी का एलान नही किया है बल्कि और समुदाय के लिए भी इसी तरह का प्रावधान है. मुख्यमंत्री ने त्यौहार, पूजा अर्चना और विशेष धार्मिक अवसरो पर सरकारी कर्मचारियों को आवश्यकता पड़ने पर छुट्टी देने का फैसला किया है.

सुरेन्द्र कुमार ने बताया की यह सुविधा सभी धर्मो और वर्गों के लोगो को विशेष अनुरोध पर अल्प समय के लिए दी जायेगी. हालाँकि सुरेन्द्र कुमार ने छुट्टी के समय और इसकी प्रक्रिया के बारे में कुछ भी स्पष्ट तौर पर नही बताया. उधर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीजेपी को जवाब देते हुए कहा की मुसलमानों को 90 मिनट छुट्टी देने का आईडिया हमें बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ से ही मिला. अगर बीजेपी को आपत्ति है तो वो अपने पूर्व सीएम् से जाकर बात करे.

Loading...