Thursday, July 29, 2021

 

 

 

इंदौर: लॉकडाउन में मुस्लिमों ने किया हिंदू महिला का आगे बढ़कर अंतिम संस्कार

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कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच जारी लॉकडाउन ने लोगो की जिंदगी को रोक कर रख दिया है। ऐसे में अंतिम संस्कार जैसी क्रियाओं में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। हालांकि कई जगह इंसानियत के मुहाफ़िज़ आगे बढ़कर इंसानियत का फर्ज अदा कर रहे है।

ताजा मामला मध्य प्रदेश के इंदौर शहर का है। जहां रानीपुरा इलाके में एक हिंदू महिला का निधन हो गया। लेकिन कोरोना के प्रकोप के चलते परिवारवालों से लेकर पड़ोसियों तक कोई कंधा देने नहीं आया। ऐसे में आस-पास के मुस्लिम पड़ोसियों ने मिल कर हिन्दू रीति रिवाज से अंतिम यात्रा निकाली और शमशान घाट पहुंचकर अंतिम संस्कार किया।

Quint की रिपोर्ट के अनुसार, मृत महिला का नाम दुर्गा था जो कि कई दिनों से घर में बीमार चल रही थी। लॉकडाउन के चलते उसके दोनों लड़के कहीं और रह रहे थे महिला की मृत्यु होने के बाद दोनों लड़कों को बुलाया गया। लेकिन चौंकाने वाली बात थी कि बाकी किसी ने कोई मदद नहीं की। इसके बाद मोहल्ले के अन्य लोगों के शामिल नहीं होने के कारण मुस्लिम युवकों ने अर्थी को कंधा देकर मुक्तिधाम तक सारा क्रिया कर्म कराया।

बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक हिंदू व्यक्ति का अंतिम संस्कार भ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने किया। जानकारी के अनुसार, बुलंदशहर के मोहल्ला आनंद विहार साठा निवासी रविशंकर का बीमारी के चलते शनिवार को निधन हो गया। मृ’तक के परिजनों ने रिश्तेदारों को सूचना दी, ताकि सभी लोग आ सके और मृत’क का अंतिम संस्कार किया जा सके। लॉकडाउन के चलते कोई भी आने में समर्थ नहीं हो सका। जब इसकी जानकारी आसपास रहने वाले मुस्लिम समाज के लोगों को मिली तो वह एकत्र हो गए।

जानकारी के अनुसार, बुलंदशहर के मोहल्ला आनंद विहार साठा निवासी रविशंकर का बीमारी के चलते शनिवार को निधन हो गया। मृ’तक के परिजनों ने रिश्तेदारों को सूचना दी, ताकि सभी लोग आ सके और मृत’क का अंतिम संस्कार किया जा सके। लॉकडाउन के चलते कोई भी आने में समर्थ नहीं हो सका। जब इसकी जानकारी आसपास रहने वाले मुस्लिम समाज के लोगों को मिली तो वह एकत्र हो गए।

रविशंकर काफी गरीब परिवार से संबंध रखते थे। इसलिए भी रिश्तेदारों ने उनसे दूरी बनाकर रखी थी। रविशंकर की मौत के बाद जब उनके बेटे ने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचित लोगों को सूचित किया तो किसी ने भी उनकी शवयात्रा में हिस्सा लेना और अंतिम संस्कार करना मुनासिब नहीं समझा। शोकसंतप्त परिवार का दुख उस वक्त और ज्यादा बढ़ गया जब मृतक रविशंकर की अर्थी को चार कंधे भी नसीब नहीं हुए।

ऐसे में कुझ देर बाद मृतक रविशंकर के घर उनके मुस्लिम पड़ोसी आए और उनके बेटे को हरसंभव मदद का आश्वासन किया। उन्होंने शोकग्रस्त परिवार के साथ अपना संवेदना प्रकट की और वो लोग अंतिम संस्कार की तैयारियों में लग गए। सभी मुस्लिम पड़ोसियों ने न सिर्फ मृतक रविशंकर की अर्थी को कंधा दिया ।

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