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देहरादून: देश में इन दिनों धर्म के नाम पर लोगों को बाँटने का काम जोरो-शोरो पर है. बावजूद अब भी कई लोग ऐसे मौजूद है. जो सांप्रदायिक ताकतों के नाकाम मंसूबों को कभी काम नहीं होने देती. इन लोगों में से एक है देहरादून के रहने वाले मोइनुद्दीन. जिन्होंने अपने हिन्दू बेटे की बड़ी धूमधाम से शादी की.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुन्ना लाल रस्तोगी अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ गांधी ग्राम में रहते थे. करीब 17 वर्ष पहले उनकी पत्नी की मौत हो गई. इससे वह पूरी तरह टूट गए और अक्सर बीमार रहने लगे. जिंदगी के अंतिम समय में उन्होंने घर बेच दिया और उससे जमा रकम बेटी की शादी के लिए बड़े भाई को दे दी. कुछ समय बाद ही उनकी मौत हो गई और दोनों बच्चे ऋतु और राकेश अनाथ हो गए.

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चाचा-चाची ने एक साल बाद ऋतु की शादी लकड़ी का काम करने वाले देवेंद्र से करवा दी. 12 साल का राकेश अकेला रह गया. तब सिंघल मंडी निवासी मोइनुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर जहां ने राकेश को अपने घर में जगह दी. उन्होंने राकेश को अपनी चार संतानों की तरह माता-पिता का प्यार दिया. राकेश भी पिता के साथ मंडी के काम में हाथ बंटाते. धीरे-धीरे राकेश इस परिवार का अटूट हिस्सा बन गए.

करीब 12 वर्ष बीतने के बाद मोइनुद्दीन को लगा कि अब राकेश की शादी करवा देनी चाहिए। नौका चौक, मोथरोवाला के चौहान परिवार के पास रिश्ता गया तो उन्होंने झट से हां कर दी. शुक्रवार को राकेश और सोनी की शादी का मौका आ गया. सुबह मोइनुद्दीन के घर पर राकेश की बड़ी बहन ऋतु और आस-पड़ोस के लोगों ने हल्दी की रस्म निभाई. इसके बाद धूमधाम से बारात निकाली गई. मोथरोवाला में पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ राकेश और सोनी ने एक-दूसरे को जयमाल पहनाई और जन्म-जन्मांतर तक साथ निभाने का वादा किया.

शाम को मोइनुद्दीन बेटे और नई बहू के साथ घर पहुंचे तो पूरे परिवार ने उनका स्वागत किया. इस मौके को खास बनाने के लिए मोइनुद्दीन के कई रिश्तेदार और आस-पास के लोग भी घर पहुंचे. राकेश ने बताया कि मोइनुद्दीन और कौसर जहां ने उन्हें हमेशा मां-बाप का प्यार दिया। उन्हें कभी नहीं लगा कि वह अनाथ हैं. परिवार में उन्हेें मां-बाप, भाई-बहन सबका प्यार मिलता है.

राकेश ने बताया कि वह शाकाहारी हैं. जब अन्य लोगों के लिए मांसाहारी खाना बनता है तो उनके लिए पहले अलग खाना बनाया जाता है. उन्होंने अपने कमरे में मंदिर बनाया है, जहां वह पूजा भी करते हैं. दीपावली पर पूरे परिवार के साथ घर में दिये जलाते हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें कभी नहीं लगा कि वह किसी दूसरे धर्म के लोगों के साथ रहते हैं. उन्हें अपना धर्म मानने और अपनी तरह जीने की पूरी छूट दी गई.