उत्तरप्रदेश में इन दिनों हिन्दू धर्म की पवित्र कांवड़ यात्रा जारी है। सावन के महीने में चलने वाली इस कांवड़ यात्रा में लाखों लोग हिस्सा लेते है। हालांकि इस दौरान हर साल डूबने से कई शिवभक्तों को मौत हो जाती है। लेकिन इस बार कांवड़ यात्रा में शिवभक्तों की जान बचाने के लिए मुस्लिम गोताखोर आगे आए है।

वभक्तों की जान बचाने के लिए गोताखोरी कैंप में 20 मुस्लिम गोताखोर तैनात हुए है। इस वक्त कैंप में 25 गोताखोर तैनात हैं। मेरठ के एसपी (सिटी) रणविजय सिंह ने कहा, ‘मैं इन गोताखोरों को जानता हूं और पुलिस नहर में लोगों के डूबने की स्थिति में और जरूरत पड़ने पर इनसे मदद लेती रही है।

उन्होने कहा, मैंने उनसे पूछा कि क्या वे कैंप का हिस्सा बनना चाहेंगे और वे खुशी से इसके लिए राजी हो गए। हम उनकी सेवाओं के बदले उन्हें इनाम भी देंगे।’ गोताखोर सूखा इसे एक अच्छा काम मानते हैं।

मुस्लिम गोताखोर में से एक सूखा कहते हैं, ‘हम सभी मुसलमान हैं लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता। मुझे लगता है कि जान बचाने की हमारी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है और जब हम किसी की जान बचा रहे होते हैं, हम तकलीफ में डूबे इंसान से यह नहीं पूछते कि उसका मजहब क्या है।’

इनमें से ज्यादातर गोताखोर मेरठ के किनारे बसे जुलहेरा औक मेहमाती गांव के हैं। इनमें से कुछ युवक बीते साल भी गोताखोरी कर लोगों की जान बचा चुके हैं। ये लोग अपर गंगनहर के किनारे कैंपिंग कर रहे हैं, जहां लाखों कांवड़िए हर साल पूजा करने आते हैं।

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