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महाराष्‍ट्र में मराठा आरक्षण अब दिल्ली पहुँच चुका है। मु्ख्यमंत्री फडणवीज आज इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बातचीत करेंगे। इस बीच अब राज्य में मुस्लिमों ने भी आरक्षण की मांग उठानी शुरू कर दी है। मुस्लिम समुदाय की और से सड़कों पर उतरने के बजाय कानूनी तरीके से ये मांग उठाई जाएगी।

इस सबंध में सोमवार को मुस्लिम समाज के नेताओं और संगठनों ने मुंबई के इस्लाम जिमखाना में बैठक की। इसमें मुंबई के कांग्रेस विधायक आरिफ नसीम खान, अमीन पटेल, असलम शेख, एआईएमआईएम के विधायक वारिस पठान, सपा विधायक अबु असिम आजमी सहित बैठक में उलेमा काउंसिल के पदाधिकारी शामिल हुए।

बैठक में शामिल लोगों ने कहा कि मुसलमान सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। मुस्लिम को उच्च शिक्षा में 5 फीसदी आरक्षण दिया गया था जिसे अदालत ने बरकरार रखा था, लेकिन सरकार इस पर कार्रवाई नहीं की और अध्यादेश समाप्त हो गया।

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उलेमा काउंसिल के महासचिव मौलाना महमूद दरियाबादी ने कहा कि अब नौकरियों और शिक्षा में मुसलमानों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अदलत ने मराठा आरक्षण को खारिज कर दिया था, लेकिन मुस्लिम आरक्षण को इस आधार पर कायम रखा था कि समुदाय आर्थिक रूप से पिछड़ा है। ऐसे में मुसलमानों को आरक्षण दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता नसीम खान ने मुस्लिम समुदाय में गुस्सा भरा हुआ है कि सरकार हमारी मांगों को मंजूरी नहीं दे रही है। हम नहीं चाहते हैं कि माहौल का ध्रुवीकरण हो। इसीलिए हम आरक्षण को पाने के लिए कानूनी साधनों का पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि अब प्रतिनिधिमंडल के जरिये मुख्यमंत्री से मिलेंगे और उनसे जल्द से जल्द मुस्लिमों को आरक्षण लागू करने की बात करेंगे।

इसके अलावा बैठक में आरक्षण की मांग को कानूनी तरीके से लड़ने के लिए वकीलों के नेतृत्व में दो प्रकार की समितियां गठित करने का भी निर्णय लिया गया है।

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