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मुंबई। काले रंग के बुर्के में हजारों की संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने आजाद मैदान में एक शांति जुलूस निकाल कर मोदी सरकार द्वारा लाए गए ट्रिपल तलाक बिल का विरोध किया.

महिलाओं का कहना है की सरकार की ओर से जो कानून बनाने की कोशिश की जा रही है वो शरिया कानून के खिलाफ है और सरकार इस कानून के तहत देश में कॉमन सिविल कोड को लागू करने की कोशिश कर रही है.

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला विंग की प्रमुख डॉ आसमां ज़ाहरा ने  कहा कि, “सरकार की ओर से यह जल्दबाज़ी में लाया गया बिल है जो कि महिलाओं के खिलाफ है और इसके ज़रिए सरकार मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में दखल करने की कोशिश कर रही है जिसे हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे.”

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उन्होंने कहा, हमारी मांग स्पष्ट है. तीन तलाक विधेयक को वापस लें. यह महिला विरोधी, लिंग न्याय विरोधी, बाल विरोधी, परिवारों को नष्ट करने वाला, मुस्लिम पतियों को जेल भेजने वाला और मुस्लिम समाज को नुकसान पहुंचाने वाला है.

मुंबई : तीन तलाक बिल के विरोध में हजारों मुस्लिम महिलाओं ने निकाला मोर्चा

डॉ आसमां ज़ाहरा ने कहा कि अभी तक पांच करोड़ महिलाएं इस मुद्दे पर एआईएमपीएलबी के रुख का समर्थन करने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान में शामिल हुई हैं. इसे विधि आयोग के समक्ष दाखिल कराया जा चुका है. यह विधेयक फिलहाल राज्यसभा में लंबित है.

उन्होंने कहा, यह विधेयक पर्सनल लॉ के साथ हस्तक्षेप करने का प्रयास है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. प्रदर्शन में उन मुठ्ठी भर महिलाओं को भी निशाना बनाया गया है, जिन्होंने लोकसभा में सरकार द्वारा जल्दी में विधेयक पारित करने के बाद मिठाइयां बांटी थीं.

डॉ आसमां ज़ाहरा ने कहा कि भारतीय संविधान लोगों को अपने धर्म की आजादी प्रदान करता है, लेकिन यह सरकार नागरिकों से उनके संवैधानिक अधिकार छीनना चाहती है.

वहीं एआईएमपीएलबी की कार्यकारी सदस्य मोनिसा बी. आबिदी ने कहा कि तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित करने वाले कानून को लाने के बजाए सरकार को समुदाय से बदलाव और आंतरिक सुधार लाने के लिए कहना चाहिए.

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