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बेंगलुरुः  कर्नाटक के शिमोगा जिले में एक कुएं की सफाई के दौरान 18वीं शताब्दी के 100 से ज्यादा रॉकेट के अवशेष मिले हैं. ये रॉकेट शेर ए मैसूर टीपू सुल्तान के शासन से जुड़े हुए बताये जा रहे है. इन रॉकेटों का इस्तेमाल 18वीं शताब्दी में मैसूर में टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ किया था.

विशेषज्ञों का कहना है कि इन रॉकेट के आगे आज की तकनीक वाले रॉकेट भी फ़ैल है. डिपार्टमेंट ऑफ़ आर्कियोलॉजी, म्यूज़ियम एंड हैरिटेज के सहनिदेशक आर शेजेश्वरा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, अप्रैल 2017 में नागरा गांव के एक किसान नागराजा राव के कुएं से गाद निकालते समय क़रीब 102 ऐसे रॉकेट मिले थे जिनका उपयोग नहीं हुआ था. ये रॉकेट सात से 10 इंच की लंबाई वाले और एक से तीन इंच तक की परिघि के थे.

उन्होंने बताया, ‘रॉकेट लगातार पानी की तलहटी में पड़े रहने के कारण जीर्ण-शीर्ण हाल में थे. उनमें काला पाउडर भरा हुआ था. यह पाउडर सल्फ़र, चारकोल और पोटेशियम नाइट्रेट का मिश्रण है. इनका विशेषज्ञों की एक टीम ने अध्ययन किया. इन सभी 100 रॉकेटों का इस्तेमाल लगभग 700 साल तक लड़ाइयों में किया गया है. इन रॉकेट का हैदर अली द्वारा लड़ी गई लड़ाइयों भी इस्तेमाल किया गया.

1799 में टीपू सुल्तान के पतन के बाद अलग-अलग तरह की 100 से ज्यादा रॉकेटों को ब्रिटिशर्स ने अपने कब्जे में ले लिया था. इसके बाद 1804 में ब्रिटिशर्स ने मैसूर रॉकेटों की तर्ज पर दूसरे रॉकेटों का आविष्कार किया. खोज के दौरान मिली रॉकेटों को इस साल मार्च अप्रैल तक सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए लगाया जाएगा.

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