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तीन तलाक बिल मुस्लिम महिलाओं के साथ इंसाफ नहीं जुल्म है की आवाज बुलंद करते हुए उत्तरप्रदेश की मुरादाबाद की मुस्लिम महिलाओं ने इस बिल को वापस लेने की मांग की.

महिलाओं का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं के हक और सम्मान को लेकर शरीयत में पर्याप्त कानून हैं. ऐसे में तीन तलाक पर बिल बनाकर सरकार कहीं न कहीं मुस्लिम महिलाओं से सम्मान से जीने का हक छीनना चाहती है. इस स्थिति में इस बिल का विरोध लाजिमी है.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला विंग की अध्यक्ष डॉ.आसमा जाहरा ने कहा कि महिलाओं और बेटियों को जिंदा रहने का हक इस्लाम शुरू होने पर मिला, वरना बेटियों को जिंदा दफना दिया जाता था. पैगंबर मुहम्मद साहब ने इस्लाम फैलाकर लोगों को बुराइयां छोड़कर अच्छे रास्तों पर चलना सिखाया.

शरीयत कानून में किसी तरह के दखल की गुंजाइश नहीं

डॉ.आसमा ने कहा कि इस्लाम से ही लोगों ने जाना की मां के कदमों के नीचे जन्नत होती है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम परिवार में एक सिस्टम होता है, अगर किसी महिला पर दिक्कत आ जाए तो उसका परिवार (मायका पक्ष) पूरी तरह से उसकी सपोर्ट करता है. भाई और पिता बचपन से लेकर आखिर तक उसके निगहबान होते हैं.

उन्होंने साफ कहा कि शरीयत हमारा कानून है, इसमें किसी भी तरह की तब्दीली नहीं होने देंगे, हम शरीयत के पाबंद रहेंगे.

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