सरकार ने साफ़ कर दिया कि कश्मीर में शांति के लिए अलगाववादियों के साथ बातचीत नहीं करेगी. हालांकि सरकार मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से वार्ता के लिये तैयार है.

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल तीन सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष सरकार की और से यह बात रखी गई हैं. दरअसल जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा था कि केन्द्र संकट को सुलझाने के इरादे से वार्ता के लिये आगे नहीं आ रहा है.

वहीँ दूसरी और पथराव की घटनाओं को रोकने के लिये सरकार ने महिला पुलिस बटालियन की संख्या बढ़ाने का फैसला किया हैं. गृह मंत्रालय की और से जम्मू कश्मीर में 1000 महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती के लिये भर्ती की जायेगी.

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि इनमें महिला पुलिसकर्मियों के 1000 पद भी शामिल हैं. इसके लिये अब तक लगभग 30 हजार आवेदन मिल चुके हैं. महिला पुलिसकर्मियों को मुख्य रूप से कश्मीर घाटी में पथराव और कानून व्यवस्था से जुड़ी ड्यूटी में तैनात किया जायेगा.

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