रोहिंग्या मुस्लिमों को शरण ने देने वाली मोदी सरकार द्वारा हजारों की तादाद में चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को नागरिकता दिए जाने के चलते आज अरुणाचल प्रदेश जल रहा है.

पीएम मोदी के इस फैसले विरोध में अखिल अरुणाचल प्रदेश छात्र संघ (एएपीएसयू) द्वारा 12 घंटे के राज्यव्यापी बंद बुलाया गया. बंद के दौरान व्यापक हिंसा देखने को मिली.नमसई, चांगलांग और कई अन्य जिले हिंसा की आग में जल रहे है. हिंसा के चलते राज्य के सभी सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद कर दिए गए है.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

राजधानी के पुलिस अधीक्षक सागर सिंह कलसी ने बताया कि बंद समर्थकों ने सुबह के व्यस्त समय के दौरान राज्य की राजधानी में एक सरकारी परिवहन निगम की बस और एक निजी वाहन को जला दिया और कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया.

चकमा और हजोंग शरणार्थी भारत में बांग्लादेश के चटगांव के पहाड़ी क्षेत्रों से आए हैं. चकमा बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं, जबकि हजोंग हिंदू हैं. चकमा लोग बंगाली-असमिया भाषा बोलते हैं. वहीँ हजोंग तिब्बती-बर्मी भाषा बोलते हैं. भारत में लगभग 1 लाख चकमा और हजोंग शरणार्थी रह रहे हैं.

2010-11 में गृह मंत्रालय की ओर से किए गए सर्वे के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों में इनकी आबादी 53,730 थी. 1987 में 45,000 अन्य चकमा लोगों ने बांग्लादेश से त्रिपुरा में प्रवेश किया था.

Loading...