देहरादून | उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावो में अब केवल एक महीने का समय बचा है. ऐसे में सारी पार्टिया उन नेताओ का अपने पक्ष में करने का प्रयास करेगी जिनका अपने क्षेत्र में बड़ा जनाधार होगा. कुछ ऐसे नेता इधर से उधर हो जायेंगे जिन्होंने ताउम्र पार्टी की सेवा की है और पार्टी ने उनको बदले में काफी कुछ दिया भी है. लेकिन सत्ता सुख के आगे सारे आदर्श और उसूल धरे के धरे रह जाते है.

आजाद भारत की राजनीती में चुनावो से पहले कई राजनेता पाला बदलते आये है. ये राजनेता हमेशा सत्ता का स्वाद चखना चाहते है इसलिए जब भी उनको लगता है की सत्ता विपक्ष के हाथो में जाने वाली है तो वो भी विपक्ष के हाथो में चले जाते है. ऐसे नेताओं के बहुत से उदहारण इतिहास में भी मौजूद है और वर्तमान राजनीती में भी.

खासकर उत्तराखंड तो इसके लिए मशहूर है. यहाँ कब कौन सा नेता किस दल में होगा कहना मुश्किल है. कांग्रेस से अलग हुए कई बागी विधायक अब बीजेपी की तरफ से लड़ते दिखेंगे. इनमे से कुछ विधायक तो ऐसे थे जिनके पूर्वजो को कांग्रेस ने इतना बड़ा नेता बनाया और फिर उनके वंशजो को. विजय बहुगुणा ऐसे ही खाटी कांग्रेसी थे जिनके पिता से लेकर दादा तक कांग्रेसी रहे और उनको कांग्रेस ने तब उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया जब वो यहाँ से विधायक भी नही थे.

अब चुनाव से पहले कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है. 40 साल से कांग्रेस के नेता रहे यशपाल आर्य , सोमवार को बीजेपी में शामिल हो गए. यशपाल आर्य, हरीश रावत सरकार में राज्य मंत्री भी थे. उनके बीजेपी में शामिल होने से कांग्रेस को कुमाऊ क्षेत्र में नुक्सान उठाना पड़ सकता है. यशपाल आर्य कुमाऊ क्षेत्र के दिग्गज नेता माने जाते है. सोमवार को दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में उन्होंने बीजेपी की सदस्य ग्रहण की.


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