Thursday, December 9, 2021

मेरठ: सैकड़ों मुस्लिम परिवारों कर रहे पलायन, उठा सवाल – ये है सबका साथ, सबका विकास ?

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ सेकड़ों मुस्लिम परिवारों के पलायन से चर्चा मे है। मेरठ के लिसाड़ी गांव के लोगों ने छोटी-छोटी बातों को सांप्रदायिक रूप देने और प्रशासन की एक तरफा कार्रवाई के चलते पलायन का ऐलान किया है।

मुस्लिम परिवारों ने बाकायदा अपने घरों के बाहर पलायन और मकान बिकाऊ के पोस्टर लगा दिए है। घरों के बाहर लगे पोस्टर पर लिखा कि ‘यह मकान बिकाऊ है। मै मुसलमान हूँ। मैं अपना मकान बेच रहा हूँ। यहाँ छोटे-छोटे विवादों पर भी सांप्रदायिक रूप दे दिया जाता है।’ इन पोस्टर के मीडिया मे सामने आने के बाद प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए है।

स्थानीय निवासी हनीफ ने बताया कि यह ऐलान उन्होंने मजबूरी में किया। नहीं तो यहां भाईचारे का इतिहास था। 1987 में जब मेरठ सुलग रहा था तो भी यहां सब ठीक था। कुछ सालों में यहां ऐसे तत्व आए हैं, जिन्होंने  फूट डालने का काम किया है. छोटे-छोटे विवादों को इन्होंने साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की।

हनीफ ने कहा कि 21 जून को दुकान में बाइक टकरा गई। जिसे साम्प्रदायिक रंग दिया गया। प्रशासन ने एकपक्षीय कार्रवाई की। हमारी एफआईआर तक भी नहीं लिखी जा रही है। वहीं पीड़ित फरजाना कहती हैं, ‘हमें इंसाफ नहीं मिल रह है, लिहाजा हम पलायन कर रहे हैं। बच्चों का विवाद था, चाहे हमारा हो या उनका, दोनों के बीच आसानी से मामला शांत कराया जा सकता था लेकिन विवाद को इतना बड़ा बना दिया गया। एकतरफा कार्रवाई है।’

फरजाना ने आगे कहा, ‘यहां जितने परिवार हैं, सभी पलायन करना चाहते हैं। हमें कोई सुरक्षा नहीं है। फरजाना ने कहा कि हमें इंसाफ चाहिए। सिर्फ हमारे बच्चों के खिलाफ ही कार्रवाई क्यों की गई।’

पलायन के इस मुद्दे पर मेरठ के एसएसपी राजेश पांडेय ने कहा कि वहां एक दुकानदार और उनके पड़ोसी में झगड़ा हुआ था। दो लोगों के इस झगड़े को साम्प्रदायिक रूप भी देने की कोशिश की गई। जिन लोगों ने गलती की थी, मारपीट की थी, हमला किया था, उनके खिलाफ मुकदमा लिखा गया। जब गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जाने लगी, तो दबाव बनाने के लिए एक कागज अपने दरवाजे पर चिपका दिया गया है।

एसएसपी ने कहा कि पलायन जैसी कोई बात नहीं है। सिर्फ पुलिस पर दबाव बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। वहां कोई ऐसी स्थिति नहीं है कि उन्हें वहां से जाने की आवश्यकता पड़े।

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