गोरखपुर. इस्लाम अमनों सलामती का मजहब है। इस्लाम का दहशतगर्दी से कोई ताल्लुक नहीं है। जोे इस्लाम मुर्दों को जलाना पसंद नहीं करता, वह जिंदों को बम से उड़ाना कैसे पसंद करेगा। इस्लाम दहशतगर्दी के खात्मे के लिए आया है।
नागपुर महाराष्ट्र से आए आलिम मौलाना फारूक खान रजवी ने छोटे काजीपुर स्थित गौसिया नौजवान कमेटी के द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
उन्होंने कहा कि दहशतगर्दों ने इस्लाम के पैगाम को समझा ही नहीं है। दहशतगर्द जिंदा तो जिंदा, अपने बुजुर्गों की कब्रों को भी बम से उड़ा रहे है। इसके पीछे वहाबी विचारधारा जिम्मेदार है। लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, आईएस वगैरह, वहाबी विचारधारा की उपज है। जितनी वारदातें हो रही है, सबमें वहाबी विचारधारा के लोग शामिल रह रहे है। ऐसे में दहशतगर्दी का खात्मा वहाबी विचारधारा के समापन से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को वहाबी विचारधार के मानने वालों की ना इमामत कुबूल है और ना ही कयादत। पैगम्बर मोहम्मद साहब ने जिस तरह इस्लाम को पेश किया, दहशतगर्दों ने इस्लाम को उस तरह नहीं समझा। उन्होंने कहा कि मुसलमान इस्लाम की तालिम हासिल करें। इस्लाम को सही तरीके से पढ़ा जायें। अहले सुन्नत वल जमात की तालीम को आम करें। इस जमाने में मसलकें आला हजरत ही सुन्नियत का सही रास्ता है, उस पर कायम रहें।
पीएम नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए बोले कि उनके सारे नारे फ्लॉप हो गए। मोदी की करनी व कथनी में काफी अंतर है। मुसलमानों को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे है। वल्र्ड सूफी सम्मेलन में जाना उनकी एक रणनीति थी।
गौसिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद ने कहा कि पैगम्बर जाग-जाग कर पूरी रात अपनी उम्मत की लिए दुआ करते है। हमें भी चाहिए कि मोहब्बत का सबूत देते हुए सुन्नतों पर अमल करते रहें। घर वालों, पड़ोसियों, रिश्तेदारों के साथ अच्छा सुलुक करें।
कार्यक्रम का संचालन मौलाना दिलशाद ने किया, जबकि इस दौरान सलाहुद्दीन, शफीकुर्र रहमान उर्फ नम्मू, जफरूल हक, मोहम्मद शोएब, नूर मोहम्मद उर्फ दानिश, अब्दुल कादीर, उजैर खां आदि मौजूद थे। (patrika)
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