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आए दिन होने वाली मोब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ मणिपुर में महिलाएं सड़कों पर उतर कर विरोध कर रही है।करीब एक महीने से मणिपुर में रात के वक्त महिलाएं मशाल जुलूस निकाल रही हैं। महिलाओं की मांग है कि इन घटनाओं को रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठाए।

महिलाओं का कहना है कि भीड़ को ये अधिकार किसने दिया वो किसी को अपराधी बताकर हत्‍या कर दे। बता दें कि बीते कुछ सालों में मणिपुर में करीब तीन और नागालैंड में दो लोग मॉब लिंचिंग के शिकार बने हैं।

मशाल जुलूस में शामिल होने वाली महिलाओं का कहना है कि कोई भी व्यक्ति तब तक दोषी नहीं होता जब तक कोर्ट न कहे। भीड़ को कोई हक नहीं है उसकी पीट पीटकर हत्या करने का। इससे न केवल उसकी जान जाती है बल्कि उसके परिवार का जीवन भी बर्बाद हो जाता है।

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चाओबा लेशराम का मामला किसी से छिपा नहीं है। साल 2010 को थौबल जिले में 25 साल के चाओबा ने नाओबी कोंथुजम नाम की लड़की से शादी की थी। लेकिन इसके आठ महीने बाद 18 अप्रैल 2011 में उसके लापता होने का मामला दर्ज करवाया गया।

नाओबी के माता-पिता को लगा कि चाओबी ने उनकी बेटी की ह’त्या कर उसके श’व को ठिकाने लगा दिया है। इसके बाद उन्होंने अपने रिश्तेदार और पड़ोसियों के साथ अपने हाथों में कानून लेते हुए चाओबा के घर को तोड़ दिया और उसे उसके परिवार सहित गांव से निकाल दिया।

ये वही सजा है जो मणिपुर में हत्या के आरोपियों को दी जाती है। फिर 21 सितंबर, 2011 को किसी लड़की का विघटित श’व मिला। उसे देखकर नाओबी की मां ने कहा कि शव उनकी बेटी का है। इसके बाद चाओबा और उसके माता-पिता को हिरासत में लिया गया।

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