मराठा आरक्षण की मांग के बीच अब महाराष्ट्र में मुस्लिमों के लिए शैक्षणिक संस्थानों में भी आरक्षण की मांग ज़ोर पकड़ रही है। रंगनाथ कमेटी की सिफारिश का हवाला देते हुए मुस्लिमों के लिए शिक्षा क्षेत्र में 5% आरक्षण मांगा जा रहा है ताकि पिछड़े मुस्लिम वर्ग का उत्थान हो सके और वह मुख्यधारा में जुड़ सके।

औरंगाबाद से आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के औरंगाबाद से विधायक इम्तियाज़ जलील ने कहा कि सरकार सिर्फ मराठों के लिए ही बोल रही है। धनगारों के लिए कौन कहेगा। धनगारों का रिप्रजेंटेशन विधानसभा में कम है. उस पर कोई नहीं कहेगा ना ही मुसलमानों के लिए। मुंबई हाई कोर्ट ने कहा है की मुसलमानों को 5 % रिजर्वेशन मिलना चाहिए। पर क्यों तुम उस बात पे चर्चा नहीं कर रहे।

इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी के मुताबिक “, पिछले 4 साल से विधानसभा में हम चीख चीखकर कर रहे हैं कि मुसलमानों का आरक्षण जिस तरीके से कोर्ट ने कहा है उस पर चर्चा की जाए और उसे दिया जाए लेकिन सरकार चुप्पी साधे बैठी हुई है सरकार केवल अपने ही लोगों मैं आरक्षण के बंदर बांट कर रही है। निश्चित रूप से मुस्लिम समाज दबा हुआ है कुचला हुआ है और पिछड़ा हुआ है।”

वहीं कांग्रेस विधायक अमीन पटेल का कहना है कि मराठा और धनगर समाज के लोगों के साथ हमें मुसलमानों के लिए भी आरक्षण चाहिए। मुसलमान समाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं। वे एसबीसीए (स्पेशल बैकवर्ड कैटोगरी-ए, मुसलिम रिजर्वेशन) के तहत आते हैं।

दूसरी और आरक्षण के लिए मराठा आंदोलन उग्र होता जा रहा है। सोमवार को पुणे में उपद्रवियों ने 100 से अधिक वाहन फूंक दिए। अब तक पाँच लोगों ने आत्महत्या कर ली। औरंगाबाद में प्रमोद होरे पाटील ने फेसबुक पर एक पोस्ट डालने के बाद ट्रेन के नीचे कूदकर आत्महत्या कर ली।