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मद्रास हाई कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र, राज्य सरकार और अपोलो अस्पताल प्रशासन को नोटिस जारी कर पूछा है कि तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री के शव को समाधीस्थल से निकालने का आदेश हम क्यों ना दें?

हाई कोर्ट के जज वैद्यालिंगम ने इस मामले में सुनवाई के दौरान गंभीर टिप्‍पणी करते हुए कहा कि जयललिता की मौत पर मीडिया के साथ हमें भी संदेह है. हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के लिए शव को बाहर निकालने में क्‍या दिक्‍कत है. ये जनहित याचिका एआईएडीएमके के प्राथमिक सदस्य पीए स्टालिन की और से दायर की गई हैं.

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याचिका में सवाल उठाया गया है कि जयललिता दो महीने पहले बिल्कुल स्वस्थ थीं, बीमार होने पर उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती किया गया, चार अक्तूबर को अपोलो हॉस्पिटल ने कहा था कि जया की स्थिति लगातार ठीक हो रही है. सरकार की तरफ से भी यही बात दोहराई गई थी.

याचिका के मुताबिक 7 नवंबर को पार्टी ने बताया कि 15 दिनों में जया अपोलो से डिसचार्ज हो सकती हैं और सब कुछ नियंत्रण में है, लेकिन 5 दिसंबर को जयललिता का निधन हो गया.

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