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देश मे एक तरफ गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमों, दलितों और आदिवासियो की जान ली जा रही है। हाल ही मे उत्तरप्रदेश के हापुड़ और बरेली मे गौकशी के आरोप मे दो मुस्लिमों को पीट-पीट कर मार डाला गया।

वहीं दूसरी और लखनऊ के कुकरैल के जंगलों में बड़े पैमाने पर गायों और बछड़ों के शव फेंके जा रहे है। इन शवों को चोरी छिपे फेंका जा रहा हैं। गायों की लाशों को रात के अँधेरे में छुपा कर फेंका जा रहा है।

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आरोप है कि लखनऊ नगर निगम द्वारा शहर में आवारा घूमने वाले बछड़े और गायों को जहर देकर मारा जा रहा हैं। और मरने के बाद नगर निगम की गाड़ी उनकी लाशों को कुकरैल के जंगल मे चोरी छिपे फेंक आती हैं।

हालांकि इन आरोपो कि फिलहाल पुष्टि नहीं की जा सकती। लेकिन सवाल उठ रहा है कि आखिर मृत गायों को रात के अँधेरे में फेंक कर क्या छिपाया जा रहा है। उनकी मौत की वजह या कुछ और?

इसके अलावा कुकरैल के जंगल में ही गायों की लाश क्यों फेंकी जा रही हैं। मृत गायों को इस तरह खुले में फेंकने के अलावा कोई और तरीका नहीं है गायों की लाशों को हटाने का ?

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