Saturday, November 27, 2021

संघ के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कहा – तीन तलाक की तरह जानवरों की कुर्बानी एक कुरीति

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bakra eid

हर साल ईद-उल-अजहा से पहले कोई न कोई बवाल जरुर खड़ा होता है. इस बार इस की शुरुआत आरएसएस से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कुर्बानी को गलत करार दिया.

ईद-उल-अजहा पर दी जाने वाली कुर्बानी को नाजायज करार देते हुए मंच ने कहा कि बकरीद में कुर्बानी को लेकर समाज में अंधविश्वास फैला है, मुसलमान अपने आपको ईमान वाला तो कहता है, लेकिन वास्तव में अल्लाह की राह पर चलने से भ्रमित हो गया है.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच यूपी के सह-संयोजक खुर्शीद आगा ने सवाल उठाते हुए कहा, कुर्बानी जायज नहीं है तो फिर जानवरों की कुर्बानी क्यों दी जा रही है?

वहीं पूर्वी यूपी के मंच संयोजक ठाकुर राजा रईस ने कहा, “जब हजरत इब्राहिम द्वारा किसी जानवर की कुर्बानी नहीं दी गई तो फिर मुस्लिम समाज में बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी क्यों दी जा रही है. बकरीद में जानवरों की कुर्बानी के नाम पर जानवरों का कत्ल हो रहा है, यह कुर्बानी नहीं है.

उन्होंने कहा, “रसूल ने फरमाया है, “पेड़-पौधे, पशु-पक्षी अल्लाह की रहमत है, उन पर तुम रहम करोगे. अल्लाह की तुम पर रहमत बरसेगी.

इसके अलावा सैयद हसन कौसर ने कहा कि तीन तलाक’ की तरह ही बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी एक कुरीति है.

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