Saturday, November 27, 2021

फर्जी एनकाउंटर केस में भाजपा नेता सहित चार को आजीवन कारावास

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करोड़ों की जमीन हथियाने के लिए पुलिस के साथ मिलकर फर्जी मुठभेड़ कराने के मामले मे भाजपा के नेता और पूर्व डिप्टी मेयर अभय सेठ को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है। इसके अलावा अलीगंज व्यापार मंडल के तत्कालीन महामंत्री अशोक मिश्र व अलीगंज थाने में तैनात रहे कॉन्स्टेबलों-रामचंदर सिंह चंदेल व शिवभूषण तिवारी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

बता दें कि 26 फरवरी 1994 को अलीगंज पुलिस ने मुठभेड़ में कानपुर व लखनऊ के शातिर अपराधी गोपाल मिश्रा को मार गिराने का दावा किया था। पुलिस कर्मियों का कहना था कि गोपाल मिश्रा ने उन पर जानलेवा हमला किया था जिसके जवाब में उन्होंने अपने प्राण बचाने के लिए गोलियों चलाईं। जवाबी फायरिंग में गोपाल की मौत हो गई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, केंद्रीय सेवा से रिटायर कर्मचारी सद‌्गुरु शरण मिश्रा का इकलौता बेटा गोपाल मिश्रा 26 फरवरी, 1994 को चौधरी टोला इलाके में हाजरा बेगम की बहन मोहसिना के घर पर था। उसकी मां अम्बेश्वरी वहां पहले से थीं। तभी अशोक मिश्रा अपने मकान से मोहसिना के मकान में कूद पड़ा। सामने के दरवाजे से अलीगंज के एसओ डीडीएस राठौर व अन्य पुलिसकर्मी जबरन अंदर आ गए। दरवाजे पर अभय सेठ भी था। अशोक के इशारे पर राठौर व अन्य पुलिसवालों ने गोपाल को गोलियों से छलनी कर दिया। अशोक ने एक छोटी बंदूक व कारतूस दिया जो एसओ राठौर ने फायर करके मृत गोपाल के हाथ के नीचे रख दिया। अशोक ने वहां मौजूद लोगों को गालियां देते हुए मुंह न खोलने की धमकी भी दी।

घटना के बाद कुछ लोगों ने कहा था कि पुलिस को मालूम था कि गोपाल कहां रहता है और एक पुलिस कर्मी उसे उसके कमरे से बुलाकर अपने साथ लाया था. यहां पहले से ही मौजूद अन्य पुलिस कर्मियों ने दिन दहाड़े उसे गोली मार दी थी। इसके बाद गोपाल मिश्रा के पिता सतगुरू शरण मिश्रा ने इस एनकाउंटर पर उंगली उठाते हुए मुख्यमंत्री को अर्जी दी जिस पर मुख्यमंत्री ने 4 मार्च 1994 को इस मुठभेड़ की जांच के आदेश दिए थे तथा सीबीसीआईडी ने इस मामले में अपनी अंतिम आख्या 16 नवम्बर 1996 को लगा कर अपनी विवेचना शुरू की।

कहा गया कि सीबीसीआईडी ने इस मामले को हत्या मानते हुए पूर्व डिप्टी मेयर अभय सेठ, अशोक मिश्रा, तत्कालीन थानाध्यक्ष अलीगंज डीडीएस राठौर, मुंशीलाल, रामचन्दर व शिव भूषण के खिलाफ 27 सितम्बर 2008 को चार्जशीट लगाते हुए बताया कि करोड़ों की जमीन हड़पने के चलते गोयल मिश्रा की फर्जी मुठभेड़ में हत्या की गई।  कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद शुक्रवार को सभी दोषियों को जेल भेज दिया गया।कोर्ट ने दोनों को जुर्माना भी भरने का आदेश दिया है।

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