बिहार की दागदार पुलिस कजी छवि पर एक और दाग लग गया है, हालांकि इस बार लगने वाला दाग बड़ा है. क्योंकि ये अंतराष्ट्रीय स्तर का है.

दरअसल 13 महीने पहले बिहार पुलिस ने एक फर्जी मामले में लेबनानी नागरिकन को न केवल गिरफ्तार किया. बल्कि उसे आतंकी बताने में कोई कसर न छोड़ी. लेकिन अब वह लेबनानी नागरिक अदालत से जमानत पर रिहा हो गया है. इस मामले में हाई कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार भी लगाई है.

जमानत पर रिहा होने के बाद लेबनानी नागरिक फदी फजल ने बताया कि वो पिछले साल 8 जुलाई 2016 को नेपाल घूमने के दौरान अनजाने में सीतामढ़ी आ गया था. सीतामढ़ी के मोहनपुर चौक पर उसे नगर थानाध्यक्ष विशाल आनंद ने बगैर वीजा भारत में आने के आरोप में जेल भेज दिय.

इस दौरान पुलिस ने लेबनानी नागरिक के बैग की तलाशी ली तो उसमें मिले हार्ड डिस्क मिली. जिसके आधार पर उसे आतंकी करार दे दिया. इस मामले की जांच का जिम्मा दारोगा विजय कुमार गुप्ता को सौंपा गया. मामले को रफा-दफा करने के लिए दरोगा ने लेबनानी नागरिक के परिजनों से रिश्वत भी मांगी.

करीब एक साल से ज्यादा वक्त तक जेल में रहने के बाद मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही एवं उसकी मनमानी पर नाराजगी जाहित करते हुए फजल को जमानत दे दी.

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