विधि आयोग ने की योगी सरकार से मॉब लिंचिंग पर कानून की सिफ़ारिश, लेकिन…

11:34 am Published by:-Hindi News
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उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने प्रदेश सरकार से मॉब लिंचिंग पर विशेष कानून की सिफ़ारिश की है। आयोग ने एक प्रस्तावित विधेयक का मसौदा भी तैयार किया है।

राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (अवकाश प्राप्त) एएन मित्तल ने मॉब लिंचिंग पर अपनी रिपोर्ट और प्रस्तावित विधेयक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुधवार को सौंपा।अगर प्रदेश में कानून बनाने पर सहमति बन जाती है तो ऐसा करने वाला यूपी देश का दूसरा राज्य होगा।

आयोग की सचिव सपना त्रिपाठी ने कहा कि ‘ऐसी घटनाओं के मददेनजर आयोग ने स्वत:संज्ञान लेते हुये भीड़ तंत्र की हिंसा को रोकने के लिये राज्य सरकार को विशेष कानून बनाने की सिफारिश की है।’ मुख्यमंत्री को सौंपी गई 128 पन्नों वाली इस रिपोर्ट में राज्य में भीड़ तंत्र द्वारा की जाने वाले हिंसा की घटनाओं का हवाला देते हुये जोर दिया है कि उच्चतम न्यायालय के 2018 के निर्णय को ध्यान में रखते हुये विशेष कानून बनाया जाये।

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आयोग का कहना है कि भीड़ हिंसा पुलिस की लापरवाही के कारण भी होती है। उन्मादी हिंसा की बढ़ती घटनाओं में पुलिस भी निशाने पर रहती है और पुलिस को जनता अपना शत्रु समझने लगती है। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रकार की घटनाएं न केवल गोवंश की कथित रक्षा को लेकर हो रही हैं, बल्कि चोरी, प्रेम प्रसंग, बच्चों की चोरी, रेप और कुछ अंधविश्वास जैसे भूत, प्रेत, चुड़ैल, तंत्र व मंत्र से भी संबंधित हैं।

उत्तर प्रदेश में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 से 2019 तक ऐसी 50 घटनायें हुई जिसमें 50 लोग हिंसा का शिकार बने, इनमें से 11 लोगों की ह’त्या हुई जबकि 25 लोगों पर गंभीर हमले हुये हैं। इसमें गाय से जुड़े हिं’सा के मामले भी शामिल हैं।

विधि आयोग की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी उन्मादी हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्र व राज्य सरकारों को चार सप्ताह में इस मामले को पृथक अपराध मानते हुए दंड की व्यवस्था करने को कहा था।

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