उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खतौली में हुए भीषण ट्रेन हादसे की रेलवे की जांच में लापरवाही बड़ी वजह बनकर सामने आई. जिसके बाद उत्तर रेलवे के चीफ ट्रैक इंजीनियर का तबादला कर दिया गया.

इसके अलावा चार अधिकारियों का निलंबन किया गया. वहीँ ही उत्तर रेलवे के जीएम, दिल्ली के डीआरएम और रेल बोर्ड के मेंबर इंजीनियरिंग को भी छुट्टी पर भेजा गया है. रेलवे ट्रैक की निगरानी टीम को भी दोषी पाया गया है. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने बताया था कि प्रथमदृष्टया एटीएस को इस घटना के पीछे किसी तरह की कोई आतंकवादी साजिश होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं.

ज्वाइंट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हादसा रेलवे लाइन के कटे होने और उसमें गैप बन जाने के कारण हुआ. साथ ही रेलवे ट्रैक पर मरम्मत के वक्त जो तय प्रक्रिया यानी स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर अपनाया जाना चाहिए था, उसमें से किसी का भी पालन नहीं किया गया.

जांच के दौरान मरम्मत के काम में लगे एक जेई मोहनलाल मीणा के बयान के मुताबिक ट्रैक पर 20 मिनट का ब्लॉक मांगा गया था, ताकि बीस मिनट तक कोई ट्रैन उस ट्रैक से न गुजरे, लेकिन कंट्रोल रूम ने या तो इसे अनसुना कर दिया या फिर इस ब्लॉकेज की मांग को गंभीरता से नहीं लिया.

रेलवे के निमयों के मुताबिक जब भी ट्रैक पर कोई मरम्मत की जाती है, तो ट्रैक पर एक बैनर फ्लैग यानी लाल झंडा लगाया जाता है, लेकिन काम कर रहे लोगों ने इस नियम का भी पालन नहीं किया.

अगर झंडा लगा होता, तो ट्रेन के ड्राइवर को संकेत मिल जाता और हादसे को टाला जा सकता था या फिर कम से कम जानमाल के नुकसान से बचा जा सकता था, लेकिन जिस झंडे को चेतावनी के लिए ट्रैक पर लगाया जाना चाहिए था, वो हादसे वाली जगह पर फोल्ड किया हुआ मिला.

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