तिरुवनंतपुरम: बीते 100सालों की सबसे बड़ी बाढ़ से जूझ रहे केरल को तत्काल बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद की जरूरत है। विदेशी मदद लेने से केन्द्र सरकार के इनकार के बाद अब केरल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से लोन लेने की कोशिशें शुरू कर दी है।

केरल सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि बाहरी कर्ज की सीमा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत किया जाए। बता दें कि केंद्र सरकार ने पहले कभी किसी राज्य को इतनी बड़ी छूट नहीं दी है। अभी तक अधिकतम .5 फीसदी बढ़ोत्तरी की ही छूट थी। इस बढ़ोत्तरी से केरल छह हजार करोड़ तक का लोन ले सकेगा।

केरल सरकार वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमैंट बैंक और इंटरनेशनल फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन बैंक सहित कई एजेंसियों से लोन लेने की संभावना तलाश रही है। इसी बीच भारत के डायरेक्टर की अगुआई वाली एक वर्ल्ड बैंक की एक टीम बुधवार को राज्य में आएगी और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, मुख्य सचिव टॉम जोस और मुख्य सचिव (फाइनैंस) मनोज जोशी के साथ बातचीत करेगी।

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बता दें कि कृषि सचिव शोभना के पटनायक के अनुसार, ‘‘राज्य में करीब 45,000 हेक्टेयर में कृषि फसल खराब हो गई हैं, उन्होंने बताया कि 20000 हेक्टेयर में धान की फसल नष्ट हुई है। गन्ने की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है, 2,000 हेक्टेयर में इलायची जैसे मसालों की फसल प्रभावित हुई है।

अनुमान के मुताबिक, राज्य को बाढ़ से करीब 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा भी हो सकता है। सड़क नेटवर्क को हुआ शुरुआती नुकसान ही 4500 करोड़ रुपये है। पावर सेक्टर को हुए नुकसान का शुरुआती अनुमान 750 करोड़ रुपये है। जल विभाग को हुए नुकसान का अनुमान 900 करोड़ रुपये है।

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