केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गुरुवार को मुस्लिम संगठन पोपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया पर प्रतिबंध लगाने की उस खबर को खारिज किया है. जिसमे कहा गया कि केरल सरकार ने केंद्र से इस मुस्लिम संगठन पर बैन लगाने की मांग की है.

तिरुवनंतपुरम में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, “किसी भी सांप्रदायिक संगठन पर प्रतिबंध लगाने का कर्तव्य केरल सरकार का नहीं है.” उनका ये बयान गुरुवार को प्रकाशित द हिंदू की एक रिपोर्ट को लेकर आया है जिसमे कहा गया कि गृह मंत्री किरन रिजिजू ने केरल सरकार ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने के लिए दबाव डाला है और हम इस मामले की जांच कर रहे हैं.

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रिजिजू ने कथित तौर पर कहा था कि केरल पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा ने जनवरी में मध्य प्रदेश में आयोजित वार्षिक डीजीपी सम्मेलन में इस मामले पर चर्चा की थी.

गुरुवार को विजयन ने कहा, “यदि कोई संगठन जो भारत में दंगे के माहोल का निर्माण करता है और सांप्रदायिक आधार पर समाज को विभाजित करता है तो उसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, तो यह पहले आरएसएस [राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ] पर प्रतिबंध लगाने के रूप में करना चाहिए.

उन्होंने कहा, पीएफआई जैसी संस्थाओं का मुकाबला प्रतिबंध से नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा, “ऐसी सांप्रदायिक और आतंकवादी संगठनों की धमकी और उनकी विचारधारा को प्रतिबंध के माध्यम से मिटा नहीं किया जा सकता है.” इस तरह के संगठनों का विरोध करने का एकमात्र तरीका उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करना. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सांप्रदायिकता और आतंकवाद में तबाह हो गई है.

पुलिस महानिदेशक बीहर ने भी गुरुवार को एक बयान जारी कर पीएफआई पर प्रस्तावित प्रतिबंध को रिपोर्टों को नकार दिया है. उन्होंने बताया, मध्य प्रदेश के टीकमपुर में जनवरी 2018 में आयोजित डीजीपी के सम्मेलन में “रैडिकललाइज़ेशन – पीएफआई, ए केस स्टडी” विषय पर एक प्रजंटेशन पेश किया गया था. उन्होंने कहा, यह कुछ राज्यों के डीजीपी के एक समूह द्वारा तैयार किया गया था.

उन्होंने कहा, इस प्रजंटेशन में कोई सुझाव नहीं था और न ही भारत की पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने के लिए कोई सिफारिश नहीं थी,” बेहरा ने कहा। “केरल पुलिस ने अभी तक पीएफआई पर इस तरह की प्रतिबंध को लागू करने के लिए प्रस्ताव नहीं दिया है और न ही लिखा है.”

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