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जम्मू के कठुआ जिले में खानाबदोश बकरवाल मुस्लिम समुदाय की बच्ची के साथ एक मंदिर में दरिंदगी कर उसकी लाश को जंगल में फेंक दी गई थी. उस बच्ची को दफनाने के लिए रसाना गांव में दो गज जमीन तक नहीं दी गई.

बच्ची को रसाना गांव से करीब आठ किमी की दूरी पर गेहूं के एक खेत में दफनाया गया. हालांकि पीड़िता के परिजन चाहते थे कि उनकी बच्ची को रसाना में ही दफानाया जाए.

दरअसल, पीड़ित पिता अपनी बच्ची को अपनी माँ और तीन बच्चो के पास दफनाना चाहता था. लेकिन गाँव के लोगों के विरोध के चलते बच्ची को दफनाने नहीं दिया गया.

मामले में नाबालिग बच्ची की दादी ने कहा, ‘तब करीब छह बजे थे। हम कब्र के लिए आधी खुदाई कर चुके थे, लेकिन गांव के लोग वहां पहुंचे और बच्ची से दफनाने से इनकार कर दिया. उन्होंने हमसे चले जाने को कहा. उन्होंने दस्तावेजों के हवाले से दावा किया कि वह जमीन हमारी नहीं है.’

पीड़ित पिता के एक रिश्तेदार के मुताबिक, बाद में बच्ची की कब्र के लिए जमीन देने वाले रिलेटिव ने बताया कि बच्ची के मां-बाप एक दशक पहले ही एक हिंदू परिवार से वहां जमीन खरीद चुके हैं, लेकिन कुछ कानूनी प्रक्रियाओं के चलते जमीन खरीदारी के कागज हासिल नहीं किए जा सके. इससे गांव को बहाना मिल गया और उन्होंने बच्ची को कब्र की जगह भी नहीं दी.

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