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वादी ए जन्नत से निकलने वाली बारूद की गंध में एक बार फिर से प्यार, मुहब्बत और भाईचारे की दिल को सुकून देने वाली एक अलग ही महक आई है.

घाटी के मुसलमानों ने धार्मिक सौहार्द की सदियों पुरानी रस्म को बनाये रखते हुए 75 वर्षीय कश्मीरी पंडित त्रिलोकी नाथ शर्मा का आगे बड़कर अंतिम संस्कार कर साम्प्रदायिक ताकतों के मुंह पर करारा तमाचा मारा है.

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अपने पडोसी को अंतिम विदाई देने के लिए सेकड़ों की तादाद में मुसलमान शरीक हुए. इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिंदू रीति रीवाजों से अंतिम संस्कार करने में पूरी मदद की.

मृतका के परिवार वालों ने कहा कि यह असली कश्मीर है. यह हमारी संस्कृति है और हम भाईचारे के साथ रहते हैं. हम बंटवारे की राजनीति में विश्वास नहीं रखते.

वहीँ स्थानीय मुस्लिमों ने कहा कि कश्मीरी पंडित की मौत दुखदायी है. हम शताब्दियों से एक दूसरे के साथ जी रहे हैं. उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार में शामिल अधिकतर लोग मुस्लिम थे. जिन्होने मृतका के अंतिम संस्कार का बंदोबस्त किया

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