लॉकडाउन प्रवासी मजदूरों के लिए किसी आपदा से कम नहीं साबित हो रहा है। अपने घरों और परिवार से दूर परेशान हाल ये मजदूर अब कब्रिस्तान में रहने तक को मजबूर है। ताजा मामला राजस्थान के चुरू का है। जहां कश्मीरी मजदूरों का समूह बीते कई दिनों से कब्रिस्तान में रह रहा था। हालांकि अब स्थानीय लोगों ने रैन बसेरे में रूकवाया।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल की तरह लकडियां फाडकर रोजी रोटी के लिये आये 23 कश्मीर के वाशिन्दे लॉकडाउन के बाद से यहां फंसकर रह गये। जब रोजगार के सारे अवसर बंद हो गए तो इनके सामने दो वक्त के खाने और रहने का संकट खड़ा हो गया। जेब और पेट खाली हुए तो कश्मीरियों ने कब्रिस्तान में पनाह ली।

इस दौरान वार्ड संख्या 24 के अनीस खान को जब इनकी ख़बर मिली तो उन्होंने सभापति पायल सैनी को इन कश्मीरियों की व्यथा सुनाई। सभापति ने इनके रहने की व्यवस्था रैन बसेरे में की लेकिन 2 माह से बेरोजगार और 15 दिनों से रेन बसेरे में आसरा लिए इन कश्मीरियों को अपनों की याद सताने लगी है।

इस दौरान व्हाटसअप ग्रुप के जरिए बिना सरकारी मदद के इन कश्मीरी मजदूरों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था से लेकर रोजा इफ्तारी तक की सुविधा मुहैय्या करवाई गई है। और अब इन कश्मीरियों को अपनों से मिलाने के लिए यही व्हाट्सएप ग्रुप मददगार बन रहा है। इस ग्रुप के माध्यम से घाटी के वाशिन्दों को उनके घर भेजने के लिए रुपए इकट्ठे किए जा रहे हैं।

30 लोगों के वाले इस व्हाट्सएप ग्रुप में अब तक करीब 40 हजार की राशि जुटा ली गई है। इस ग्रुप का दावा है कि जल्द ही सभी के प्रयास से इनकी घर वापसी हो जाएगी। वहीं प्रशासन से मदद मांगी तो प्रशासन ने अनुमति पत्र बनाने का तो वायदा किया लेकिन वाहन स्वयं का जुटाने की बात कही गई।

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