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आमतौर पर घाटी में प्रदर्शनकारियों के जनाजों में भारी भीड़ उमड़ती हैं लेकिन शनिवार शाम आतंकियों के हाथों शहीद हुए पुलिसकर्मी के जनाजें में भारी भीड़ देखी गई. जनाजें में शामिल लोग आतंकी हमलों को लेकर गुस्से में भी दिखे.

शनिवार को कश्मीर के चोगुल हंदवाड़ा इलाके में घात लगाए बैठे आतंकियों ने पुलिस पैट्रोलिंग टीम पर हमला कर दिया था.  इस हमले में जम्मू कश्मीर पुलिस के सिपाही अब्दुल करीम शेख शहीद हो गए थे.

शहीद के रिश्तेदार अब्दुल कबीर ने कहा, “जिसने भी अब्दुल करीम को मारा है, मैं उसे कभी भी मुजाहिद नहीं कहूंगा. मैं स्पष्ट रूप से कहू रह हूं, फिर चाहे परिणाम कुछ भी हो. यह आतंकवाद है और इसे रोका जाना चाहिए.”

वहीँ पड़ोसी अब्दुल गनी शेख का कहना है, “यदि वे जिहाद के नाम पर किसी को मारते हैं, तो हम उसे स्वीकार नहीं करते.”  गांव के मोहम्मद जमाल ने कहा, “यह जेहाद नहीं है. यह इस्लाम के खिलाफ है.”

अब्दुल करीम शेख विशेष पुलिस अधिकारी थे. स्थनीय लोगों ने बताया कि उन्होंने कभी भी किसी को परेशान नहीं किया और हमेशा जरूरतमंदों की मदद करते थे.


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