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गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा यात्रा के नाम पर कासगंज में मचा बवाल अचानक हुई घटना नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश थी. जो पहले से ही रची गई थी. इस हिंसा की पूरी जमीन सोशल मीडिया पर तैयार हुई थी. इस बात का दावा आयुष नाम के युवक ने किया है.

कासगंज के सोरो क्षेत्र निवासी आयुष शर्मा के ट्विटर हैंडल पर 20 जनवरी को किये ट्वीट में पहले हिंसा के बारे में शंका जता दी गई थी. ख़ास बात ये रही कि ये ट्वीट स्थानीय प्रशासन से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक को किये गए.

इस ट्वीट में कहा गया, प्लीज लुक इनटू द मैटर सर, दिस कैन बी हिंदू-मुस्लिम हियर’. इस मामले में 26 जनवरी को हिंसा के बाद एक और ट्वीट किया गया-‘ऑल वाज प्री-प्लांड इन कासगंज, आइ हैव ट्वीटेड फॉर दिस फाइव डेज एगो.’

नेशनल हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक  इस घटना के 5 दिन पहले दो समुदायों पर आपसे में  फेसबुक पर भी वार हुआ था, जिसमें एक दूसरे के इलाकों में ना आने की धमकी दी गई थी. इस पोस्ट पर करीब 1000 कमेंट हुए थे जिसमें घटना के होने की आशंका थी कि अगर गणतंत्र दिवस को यात्रा दूसरे इलाके में गई तो ऐसी हिंसा हो सकती है.

फिलहाल इस बात को पता नहीं है लग पाता है कि ये ट्वीट सच थे या गलत लेकिन इन ट्वीट के आजाने के बाद पुलिस हरकत में जरुर आ गई है. आइजी कानून-व्यवस्था हरिराम शर्मा ने बताया कि कासगंज हिंसा में दर्ज मुकदमों की जांच के लिए गठित एसआइटी ही ट्वीट की भी जांच करेगी. जो तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी.

डीजीपी के पीआरओ एएसपी राहुल श्रीवास्तव के मुताबिक उन्होंने आयुष शर्मा से फोन पर वार्ता की. आयुष ने बताया कि फेसबुक पर चैटिंग कर रहे दो सम्प्रदाय के युवकों के बीच कटुता भरे संवाद हुए थे जिन्हें देखकर आयुष ने फेसबुक के उस लिंक के साथ ट्वीट किया था. अब वह लिंक डिलीट कर दिया गया है। कहा कि फेसबुक चैट में 26 जनवरी के दिन हिंसा होने की बात नहीं थी.

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