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आमतौर पर देखा जाता हैं कि मदरसों में पड़ने वाले छात्र ही हिफ्ज़े क़ुरआन को मुकम्मल करते हैं. उच्च स्तरीय शिक्षा ग्रहण करने वाले आमतौर पर सिर्फ इस्लामी की बुनयादी शिक्षा सहित कुरान पड़ना ही जानते हैं. लेकिन भटकल के रहने वाले एमबीए की पड़ाई के साथ साबित ने कुरान हिफ्ज़ भी मुकम्मल किया हैं. जो एक बहुत बड़ी बात हैं.

साबित ने भटकल में ही एमबीए की पड़ाई के साथ इस साल कुरान हिफ्ज़ भी मुकम्मल किया. अब उन्हें रमजान के पाक महीने का इन्तेजार हैं. ताकि वे रमजान में कुरान सुना सके. साबित भटकल में छोटे बच्चों को कुरान पड़ना सिखा रहे हैं.

भटकल दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक का एक छोटा सा शहर है, यहां पर न तो आशिके कुरान की कमी है और न ही हाफिज कुरान की. छोटे से शहर में सात सौ से अधिक लोग हाफिज कुरान हैं और इस से अधिक संख्या में महिलाएं और लड़कियां हाफिजे कुरान हैं.

इस बारें में साबित का कहना है कि उनकी दिली ख्वाहिश है कि अन्य युवक भी इस नेक काम में पहल करें. साबित के अनुसार भटकल में नन्हे मुन्ने बच्चों को कुरान हिफ्ज़ याद करता देखकर उसे यह प्रेरणा मिली.


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