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कर्नाटक में विधासभा चुनाव से ठीक पहले सिद्धारमैया सरकार ने गुरुवार को राज्य ध्वज का अनावरण किया. लाल, सफ़ेद और पीले रंग वाला ये झंडा सिद्धारमैया का कन्नड़ अस्मिता पर खेला गया बड़ा दांव है.

इस आयताकार ध्वज का नाम ‘नाद ध्वज’ है. इस ध्वज के बीचो-बीच राज्य का प्रतीक दो सिरों वाला पौराणिक पक्षी ‘गंधा भेरुण्डा’ भी है. केंद्र से मंजूरी मिलते ही कर्नाटक का यह आधिकारिक रूप से राजकीय झंडा बन जाएगा. यदि मोदी सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है तो कर्नाटक संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा प्राप्त जम्मू-कश्मीर के बाद देश का दूसरा ऐसा राज्य बन जाएगा, जिसका आधिकारिक तौर पर अलग झंडा होगा.

बता दें कि राज्य के ध्वज का डिज़ाइन तैयार करने के लिए प्रख्यात कन्नड़ लेखक और विद्वान हम्पा नागराजैया की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी. इस समिति ने आज सुबह विधानसभा में नई डिज़ाइन को प्रस्तुत किया. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने डिजाइन स्वीकार कर कहा कि राज्य का झंडा होना असंवैधानिक नहीं है और सभी राज्य अपने अलग झंडे बना सकते हैं.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राज्य के झंडे का अनावरण करते हुए.

सिद्धारमैया ने कहा, “कन्नड़ ध्वज असंवैधानिक नहीं है. संविधान द्वारा इस पर किसी तरह की कोई रोक नहीं है. इसको लेकर सिर्फ एक नियम है कि राज्य के ध्वज को हमेशा राष्ट्रीय ध्वज से नीचे लहराना होता है, जिसका पालन हम वैसे भी करेंगे ही. हम केंद्र को ये डिज़ाइन भेजेंगे. आशा है कि वे इसे स्वीकार कर लेंगे. ये मांग काफी दिनों से उठ रही थी. मुझे खुशी है कि आखिरकार हमें ‘कन्नड़ ध्वज’ मिल गया.”

हालांकि केंद्र की ओर से कर्नाटक के ध्वज को मंजूरी पर फिलहाल संशय है. गृह मंत्रालय ने पहले साफ कर दिया है कि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जिसमें राज्यों के लिए अलग झंडे की बात कही गई हो या फिर अलग ध्वज को प्रतिबंधित करता हो. वहीँ बीजेपी अलग झंडे को ‘देश की एकता और अखंडता’ के खिलाफ मानती रही है.

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