विधानसभा चुनावों से पहले ईवीएम पर राजनीतिक बयानबाजी से निपटने के लिए कर्नाटक चुनाव आयोग ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है.

चुनाव आयोग का दावा है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ संभव ही नहीं है. हालांकि अगर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ करने का अगर कोई दावा करता है और उसे छेड़छाड़ को साबित करना होगा. अगर साबित नहीं कर पाता है तो उसे छह महीने की जेल की सज़ा होगी.

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कर्नाटक के चुनाव आयुक्त संजीव कुमार ने कहा कि ‘ईवीएम और वोटर वेरीफाएबल पेपर आॅडिट ट्रेल (वीवीपैट) के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. मीडिया के एक धड़े की ओर से ईवीएम से छेड़छाड़ की बात को हवा दे रहे हैं. चुनाव आयोग इसे एक गंभीर मुद्दा मानता है. अगर इस संबंध में कोई ग़लत ख़बर प्रकाशित होती है या किसी तरह की अफवाह फैलाने की कोशिश की जाती है तो चुनाव आयोग उस व्यक्ति या संस्था के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मुक़दमा दर्ज कराएगा.’

बता दें कि कांग्रेस नेताओं ने उन इवीएम मशीनों का विरोध किया है जिन्हें गुजरात और उत्तर प्रदेश से लाया जा गया है. इस बारे में उन्होंने कहा कि ‘यह बहुत सामान्य प्रक्रिया है कि एक राज्य का ईवीएम किसी दूसरे राज्य के चुनाव में इस्तेमाल हो. पंजाब के ईवीएम गुजरात चुनावों के दौरान इस्तेमाल किए गए थे.’

224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा के लिए  85,650 बैलेटिंग यूनिट (BU), 66,700 कंट्रोल यूनिट (CU) और 73,700 वीवीपैट की जरूरत है. जिनमें से 27000 BU, 20,000 CU और 13,000 VVPAT गुजरात से, 40,650 BU और 31,700 CU उत्तर प्रदेश से बाकिउपकरण झारखंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से लाए जाएंगे.

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