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अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन पर राम मंदिर की वकालत करने वाले शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी को शिया समुदाय के सर्वोच्च धर्म आयतुल्लाह अल सैयद अली अल हुसैनी अल सिस्तानी से बड़ा झटका लगा है।

उन्होने अपने फतवे में कहा कि मंदिर अथवा किसी अन्य धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए वक्फ की संपत्तियां नहीं दी जी सकतीं। हालांकि रिजवी ने फतवे को मानने से इंकार कर दिया। जिसके बाद शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने वसीम रिजवी को इस्लाम से खारिज कर दिया। ऐसे में अब वसीम ने कहा है कि मौलाना को इस्लाम की समझ नहीं है। वह प्रश्नोत्तरी को फतवा बता रहे हैं।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, रिजवी ने कहा कि बाबरी ढांचे के बाबरी पक्ष के गवाह मौलाना कल्बे जव्वाद ने हमें और शिया वक्फ बोर्ड के सदस्यों को इस्लाम से खारिज कर दिया है, क्योंकि उनके अनुसार हम ईराक से बाबरी ढांचे के सिलसिले में एक शरारती तत्व द्वारा किए गए भ्रामक सवाल-जवाब (जिसको मौलाना कल्बे फतवा बता रहे हैं) को नहीं मानकर सुप्रीम कोर्ट से अपना हलफनामा जो राम मंदिर के निर्माण के संबंध में दिया था, वापस नहीं ले रहे हैं।

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मौलाना जव्वाद को इस्लाम की कम मालूमात है, इसलिए वे प्रश्नोत्तरी को फतवा मानकर हमें इस्लाम से खारिज कर रहे हैं। इस्लाम से किसी को भी खारिज करने का अधिकार दुनिया में किसी को नहीं है। चाहे कोई भी मुसलमान कितना ही बड़ा गुनहगार क्यों न हो। वसीम ने कहा कि मौलाना कल्बे का खुद का आचरण शक के घेरे में है। उन पर तमाम कार्यवाहियां चल रही हैं जिसमें वक्फखोरी भी शामिल है।

बता दें कि मौलाना जव्वाद ने कहा कि अयातुल्लाह सीस्तानी ने जो फतवा दिया है, वही नजरिया शियाओं का भी है। मौलाना ने कहा, “हम पहले भी कह चुके हैं कि मस्जिद की जमीन पर सिर्फ मस्जिद ही बन सकती है।” मौलाना ने कहा कि वक्फ बोर्ड के वे सदस्य जो रिजवी का समर्थन कर रहे हैं, उनकी खामोशी यह साबित कर रही है कि वे उनके सभी अपराधों में शामिल हैं।

मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि “कौम वक्फ बोर्ड के सदस्यों से मांग करे कि वे अयातुल्लाह सीस्तानी की निंदा करने वाले अपराधी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को उनके पद से हटाएं, वरना उनका बहिष्कार किया जाए।”

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